Sat. Dec 7th, 2019

विश्व एड्स दिवस- मौत तो तय है, लेकिन आपका सहयोग संवार सकता है बचे पल

विश्व एड्स दिवस

एड्स का नाम सुनते ही लोग दूर भागने लगते हैं। आज विश्व एड्स दिवस है उनका दिन जिनकी मौत तो तय है लेकिन समाज के ताने उनसे उनके बचे कुछ पल भी छीन लेता है। यह एक ऐसी बिमारी है जिससे पीड़ित की मौत तय होती है बस तारिख का पता नहीं होता है। इसका इलाज कराते-कराते परिवार वाले भी परेशान हो जाते हैं। समाज इतनी बुरी नाराज से पीड़ितों को देखते हैं की उनके अंदर जीने की इच्छा ही मर जाती है।  एक इंसान ही इंसान का दर्द समझ सकता है। आज एक बात मन में बैठा लीजिये कि एड्स पीड़ित के बचे पल को आप अपने कठोर शब्दों से खत्म नहीं करेंगे। देश का नागरिक होने के नाते आपको अगर इसकी जानकारी है तो दुसरो को भी इसके प्रति जागरूक करें।

विश्व एड्स दिवस, जानिए एड्स के बारे में

आपको पता है ये एड्स होता क्या है? पटना के चिकित्सक डॉ. दिवाकर तेजस्‍वी बताते हैं कि एड्स एचआइवी के संक्रमण के बाद की वह स्थिति है, जिसमें मनुष्‍य अपने प्राकृतिक रोग प्रतिरक्षण की क्षमता को खो देता है। उन्होंने बताया की एड्स खुद में कोई बीमारी नहीं है, इसमें पीड़ित मनुष्‍य अपनी रोग प्रतिरोधी क्षमता खो देने के कारण कई संक्रामक बीमारियों का शिकार हो जाता है। ऐसे लोगों में सर्दी-जुकाम तक के संक्रमण का इलाज कठिन हो जाता हैं। अगर ऐसे सर्दी जुखाम हो जाये तो लोग इलाज बिना कराये ही ठीक हो जाते हैं लेकिन एड्स के समय पर ये एक बड़ी बिमारी की तरह बन जाता है। एचआइवी संक्रमण के कई साल बाद एड्स की स्थिति आती है। इस बीच संक्रमित व्‍यक्‍त बिना किसी विशेष लक्षण के रह सकता है।

 

कैसे होता है एड्स

इस संबंध में पटना के डॉ. दिवाकर तेजस्‍वी बताते हैं कि एचआइवी इन्फेक्शन असुरक्षित शारीरिक सम्न्बंध बनाने, संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तमाल किये गए इंजेक्शन को दूसरे व्यक्ति द्वारा इस्तमाल करने से, संक्रमित रक्त से हो सकता है। सबसे खतरनाक चीज़ ये कि यह संक्रमण एचआइवी पॉजिटिव गर्भवती महिला से जन्म लेने वाले बच्चे में भी हो सकता है। संक्रमित मां के स्‍तनपान कराने से भी बच्चे को संक्रमण हो सकता है। आंकड़ों की बात करें तो सर्वाधिक 94 फीसद संक्रमण का कारण असुरक्षित यौन संबंध है। असुरक्षित सम्ब्नध के कारण आज कई लोग इससे पीड़ित हैं।

एड्स के लक्षण

गोपालगंज के डॉ. संदीप कुमार बताते हैं कि शुरुवात में तो इसके लक्षण नहीं दीखते हैं। इसके लक्षण कुछ साल बाद पता चलते हैं। अगर लगातार बुखार व थकावट महसूस हो, वजन कम हो, सूखी खांसी हो, दर्द रहे तथा चमड़ी, मुंह, आंखों के नीचे या नाक पर धब्बे पड़ें तो एचआइवी की जांच करा लेनी चाहिए।ये बताते हैं कि एड्स से मौत तय है, लेकिन एचआइवी संक्रमण के बाद इसे लंबे समय तक रोका जा सकता है। वैज्ञानिक इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीन की खोज कर रहे हें। फिलहाल बचाव ही सुरक्षा है।

 

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अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति इससे पीड़ित है तो उसे ताने देकर उसकी बिमारी और मत बढ़ाइए। ये आपका फ़र्ज़ बनता है कि उसके बचे कुछ पलों को आप यादगार बना दें। एड्स से पीड़ित व्यक्ति को या उसके परिवार को अपने बीच से अलग होने कि बात न कहे क्यूंकि वो भी इंसान है और बिमारी किसी को भी हो सकती है। आप किसी से भी असुरक्षित संबंध न बनाये और नहीं इस्तमाल किये गए इंजेक्शन का उपयोग करें।

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