Thu. Apr 2nd, 2020

शेखपुरा धान फर्जीवाड़ा केस आया सामने

शेखपुरा धान फर्जीवाड़ा

शेखपुरा धान फर्जीवाड़ा : बिहार के शेखपुरा जिले में धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया में लाखों रुपये की फर्जी निकासी का मामला सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में, 22 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, जबकि शेखपुरा जिला शुष्क क्षेत्र है। फर्जीवाड़े के बाद, जिला मजिस्ट्रेट ने डीडीसी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया।

गौरतलब है कि शेखपुरा जिला एक सूखा जिला है। आपदा विभाग और कृषि विभाग द्वारा किसानों को अनुदान की राशि भी उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन तर्क यह है कि किसानों के नाम पर किसानों के नाम से धान बेचा गया है। इसमें लाखों रुपये का गबन करने का आरोप है।

एक सवाल यह भी उठ रहा है कि जब किसानों के खेत बंजर थे, तो लक्ष्य को पूरा करते हुए 22 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद कैसे हुई? किसानों का आरोप है कि फर्जी कागज पर धान खरीद कर राशि के कागजात जब्त किए गए हैं।

शेखपुरा धान फर्जीवाड़ा : स्थानीय किसानों का कहना है…..

स्थानीय किसानों का कहना है कि धान खरीद में काफी मिश्रण है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसानों ने कहा कि अगर जांच की गई तो कई अधिकारियों की संलिप्तता उजागर हो सकती है।

इस बीच, डीएम ने डीडीसी की अध्यक्षता में धान खरीद की शिकायत को गंभीरता से लिया और समिति का गठन किया। डीडीसी 3 मई तक जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपेंगे।

हालांकि, धान खरीद में गड़बड़ी से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन जांच समितियां इस बात का इंतजार कर रही हैं कि मास्टरमाइंड कौन है और इसमें कौन-कौन शामिल हैं और कब इसका पूरा खुलासा हुआ है।

बिहार एक्सप्रेस शेखपुरा धान फर्जीवाड़ा केस की अगली कड़ी पर अपडेट मिलते ही अपने पाठको से मुखातिब  होगा और हम विश्वास दिलाते है कि इस मामले की पूरी सच्चाई सबके सामने ज़रूर आएगी

 

स्थानीय किसानों का कहना है

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