Sat. Oct 31st, 2020

जब बच्चों की पढ़ाई न छूटे इसलिए स्कूल बन गई ट्रेन -एक प्रेरणादायक सच्ची कहानी

स्कूल बन गई ट्रेन

स्कूल बन गई ट्रेन : बिहार को बाहर के लोग यह कह कर गलत आलोचना करते हैं कि यहाँ के बच्चे पढ़ने-लिखने में अपना मन नहीं लगते हैं लेकिन सच तो यह है कि पढ़ाई का जज़्बा इतना ज़्यादा है यहाँ के बच्चों में और पढ़ाने के लिए तो उनसे भी ज़्यादा जज़्बा देखने को मिलता टीचर्स में. औरंगाबाद की अनोखी घटना के बारे में जानकर आपकी सोच भी बदल जाएगी की वाकई में सच क्या होता है पढ़ाई के प्रति जज्बे का.

बिहार के औरंगाबाद ज़िले में एक सरकारी मिडिल स्कूल के हेडमास्टर ने बच्चों को पढ़ाई से मेल कराते हुए स्कूल बिल्डिंग का ही मेकओवर कर डाला और उसे नया रूप दे डाला. अब यह स्कूल एक “स्कूल एक्सप्रेस” बन कर उभरा है. इससे बच्चों के अंदर पढ़ाई के प्रति लगाव बढ़ा है और इसी वजह से यह चर्चा का केंद्र भी बना हुआ है.

स्कूल बन गई ट्रेन : स्कूल के हेडमास्टर का कमाल !

स्कूल के हेडमास्टर सुखदेव राम ने जब मिडिल स्कूल का चार्ज संभाला तो यह काफी ख़राब हालत में था. बच्चो की अटेंडेंस तो सबसे ज़्यादा ख़राब थी और ज़रुरत से भी नीचे थी. चार कमरों वाले इस मिडिल स्कूल में 400 से भी ज़्यादा बच्चे पढ़ते हैं लेकिन केवल 150 बच्चे ही आते थे क्योंकि बाकी सब स्कूल छोड़कर भाग जाते थे .

अक्षरा सिंह का नया गाना हुआ रिलीज़, इस नए गाने ने मचा दी शोर

स्कूल के हेडमास्टर सुखदेव राम ने इस विकट परिस्थिति को बदलने की ठान ली और बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के एक नए आईडिया पर काम किया. इसके तहत उन्होंने अपनी पेंटिंग के हुनर से स्कूल को एक ट्रेन का लुक दिया और उसका कायाकल्प करने में जी-जान से जुट गए. बच्चों की जानकारी से दूर यह काम वह स्कूल बंद हो जाने के वक़्त करते थे. देखते-देखते मेहनत रंग लाई और करीब एक महीने में स्कूल एक ट्रेन स्कूल में बदल गया और इससे आकर्षित होकर बच्चे स्कूल में भी उत्साहित होकर अब स्कूल जाने लगे हैं.

जहाँ चाह है वहाँ राह है ! हेडमास्टर सुखदेव राम की जज़्बे से भरी सच्ची कहानी पढ़ने वाले बच्चों और पढ़ाने वाले टीचर्स के लिए उम्दा मिसाल है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *