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अस्पतालों में बढ़ा घोटाला : जानिए किन अस्पतालों द्वारा हुए ऐसे घोटाले

अस्पतालों में बढ़ा घोटाला

अस्पतालों में बढ़ा घोटाला : 2008 में बीपीएल परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरूआत की गई। वैशाली जिले में 43 निजी नर्सिंग होम को योजना के अनुसार पंजीकृत किया गया। कई ने फर्जी कार्ड के सहारे 2015 से 2016 के बीच पैसे बनाए। बता दें कि जिन अस्पतालों ने इस घोटाले को अंजाम दिया उनमें से कई ने आयुष्मान भारत योजना के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन भी दिया है। कुछ अस्पताल शॉर्ट लिस्ट भी हुए हैं। अंतिम मुहर अभी नहीं लगी है।

अस्पतालों में बढ़ा घोटाला : यह थी गरीबों के इलाज की प्रक्रिया

सरकारी और निजी नर्सिंग होम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीपीएल परिवार 30 हजार रुपए तक का ईलाज मुफ्त करवा सकते थे। जिसके लिए 30 रुपए के शुल्क पर लोगों का एक स्मार्ट कार्ड बनाया जाता था जिसमें परिवार के एक मुख्य सदस्य का फोटो, नाम, पता और उसके अंगूठे का निशान होता था। यहां तक कि ईलाज के दौरान हॉस्पीटल में खाना और बार बार 100 रुपए के हिसाब से 10 बार आने जाने का पैसा भी दिया जाता था। ऑपरेशन के बाद टीपीए के एनओसी के बाद खर्च का पैसा नर्सिंग होम संचालक के अकाउंट में सरकार भेजती थी।

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अस्पतालों में बढ़ा घोटाला : ऐसे हुआ खुलासा

फर्जी कार्ड बना कर उससे पैसे निकालने का खेल शुरू हुआ। कार्ड पर फोटो किसी का, नाम किसी का, पता किसी का और एक अंगूठे के निशान पर सैकड़ों कार्ड बने। ताकि सिस्टम पर अपलोड आराम से हो जाए। वहीं मरीजों को फर्जी कागजातों पर भर्ती किया जाता था। दवा के फर्जी कागज़ बनाए जाते थे। इसके बाद बकायदा डॉक्टर फर्जी मरीजों के ओटी नोट और डिस्चार्ज नोट बनाते थे। इन्हीं पेपर्स को आधार बना नर्सिंग होम अपना क्लेम जायज बनाते और सरकारी खाते से पैसा की निकासी करते।

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वैशाली गोल्डेन कार्ड बनाने में दूसरे स्थान पर!

बता दें कि बिहार में आयुष्मान योजना का कार्ड बनाने में वैशाली दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान बेगूसराय का है जहां 1,25,884 कार्ड बने हैं। वैशाली में 1,04,398 कार्ड अब तक बने है। इसकेे लिए 18 अधिकृत सेंटर हैं। सहज वसुधा केंद्र में 30 रुपए में भी यह कार्ड बनता है। वैशाली में 269 लोगों ने कार्ड का लाभ लिया है।

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