Tue. Dec 1st, 2020

रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन से बिहार में शोक की लहर, पढ़िए पूरी ख़बर

रघुवंश प्रसाद सिंह के

दिल्ली के ऐम्स में काफी समय से इलाज करा रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का आज निधन हो गया। उनके निधन से बिहार शोक में डूबा हुआ है। दुनिया से अलविदा कहने के कुछ दिनों पहले ही इन्होंने राष्ट्रीय जनता दल से अपना पुराना रिश्ता तोड़ा था। बिहार विधानसभा चुनाव होने के पहले ही इन्होंने आरजेडी को अपना इस्तीफा पत्र जारी कर दिया था, जिससे कि बिहार की राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गई थी। सोमवार को वैशाली जिले में इनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

रविवार को 74 वर्षीय पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन हो गया। दो दिन पहले ही इनकी हालत बिगड़ गई थी। इन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही थी इसलिए वेंटिलेटर पर इन्हें रख दिया गया था। इसके पहले वह कोरोना संक्रमित हो गए थे इस वजह से पटना के ऐम्स में इलाज करा रहे थे। फिर कुछ ठीक होने के उन्हें पोस्ट कोविड मर्ज़ के इलाज के लिए दिल्ली के ऐम्स में ले जाएगा था।

अपको बता दें कि इनकी मृत्यु होने से ठीक तीन दिन पहले यानी 10 सितंबर को आरजेडी की प्राथमिक सदस्यता से इनके इस्तीफा देने से बिहार के राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गई थी। हालांकि, राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव ने इनके इस्तीफ़े को स्वीकार नहीं किया था और कहा था कि, आप कहीं नहीं जा रहे हैं। लेकिन लालू की अपील को नज़रंदाज़ करते हुए इन्होंने आगे भी पत्र जारी किए थे। इनके निधन पर लालू ने शोक जताते हुए ट्वीट किया, बहुत याद आएंगे।’

इनके राजनीतिक सफर के बारे में जानें

अपको बता दें कि वैशाली जिला के शाहपुर में छह जून, 1946 को रघुवंश प्रसाद सिंह का जन्म हुआ था। इनके राजनीतिक सफर के बारे में बात करें तो इन्होंने पांच-पांच बार लोकसभा-विधानसभा और एक बार विधान परिषद में प्रतिनिधित्व किया। वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके थे। 1973 में उन्हें संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का सचिव बनाया गया था। 1977 से 1990 तक वे बिहार विधानसभा के सदस्य थे। उसी दौरान बिहार में कर्पूरी ठाकुर की सरकार में ऊर्जा मंत्री भी बनाए गए। 1990 में विधानसभा में उपाध्यक्ष बनाए गए। इसके बाद जब लालू प्रसाद की सरकार बनी तो वह विधान परिषद के सभापति और बाद में मंत्री भी बनाए गए।

लालू के करीबी थे, रघुवंश

अपको बता दें कि आरजेडी पार्ट में अपने विरोधी रामा सिंह की एंट्री की कोशिशों से रघुवंश नाराज चल रहे थे। कहा जाता है कि वे लालू के बेहद करीबी थे। इन्होंने हमेशा से वही बोला जो लालू सोचते थे। करीब पांच दशकों की राजनीति में केवल एक बार को छोड़कर दोनों की विचारधारा में कभी मतभेद नहीं देखने को मिला। लेकिन दुनिया से अलविदा कहने के कुछ दिनों पहले ही इन्होंने आरजेडी को भी अलविदा कह दिया था।

 

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