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पूर्णिया सीट पर अब की बार कांग्रेस का हाथ, एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला

पूर्णिया सीट

पूर्णिया सीट अब की बार महागठबंधन में हुए सीट शेयरिंग के बाद पूर्णिया लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में आई है। खबर है कि सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड गोपाल सेन गुप्ता के नाम, 4 बार चुने गए।मोदी लहर में चुनाव हारने वाले भाजपा प्रत्याशी उदय सिंह इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं।

पूर्णिया सीट लोकसभा चुनावों का जानिए रहस्य

2014 में चुनाव हारने वाले भाजपा प्रत्याशी उदय सिंह इस बार कांग्रेस से लड़ रहे हैं चुनाव। उदय सिंह भाजपा के टिकट पर दो बार सांसद रह चुके हैं। 2004 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार पप्पू यादव और 2009 में निर्दलीय प्रत्याशी शांति प्रिया को हराया था। एनडीए ने यहां से जदयू उम्मीदवार संतोष कुशवाहा को दोबारा टिकट दिया। 1998 में जय कृष्ण मंडल ने इस सीट पर भाजपा का खाता खुलवाया था। वे पप्पू यादव को हराकर लोकसभा पहुंचे थे।

पूर्णिया से गुजरता है नेपाल का रास्ता

पूर्णिया पूर्वोत्तर जो कि बिहार का सबसे बड़ा शहर है जहां से नेपाल और पूर्वोत्तर की ओर जाने का रास्ता गुजरता है। वर्तमान में पूर्णिया प्रमंडलीय मुख्यालय है, जिसके अंतर्गत अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जिले आते हैं।

इमरजेंसी से पहले कांग्रेस थी कैप्टन

1975 में लगे आपातकाल से पहले पूर्णिया में कांग्रेस का दबदबा था। इमरजेंसी से पहले हुए पांचों चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। 1952, 1957, 1962 और 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के फनी गोपाल सेन गुप्ता जीते। 1971 में मोहम्मद तारिक कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे।

1984 के बाद कांग्रेस से छूट गई थी सीट

1977 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी लहर के बीच यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। भारतीय लोक दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे लखनलाल कपूर ने कांग्रेस की माधुरी सिंह को हरा दिया। 1980 में दोबारा इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा हो गया। 1980 और 1984 में माधुरी सिंह इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनीं। इसके बाद इस सीट पर हुए 8 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस एक बार भी नहीं जीत सकी है।

आयोग ने 1998 में रद्द कर दिया था चुनाव

आजादी के बाद से अब तक पूर्णिया लोकसभा सीट से 17 सांसद चुने गए लेकिन एक दौर ऐसा था, जब चार साल न केवल पूर्णिया सांसद विहीन रहा, बल्कि संसद में इस क्षेत्र का कोई प्रतिनिधि नहीं था। बूथ लूटने की शिकायत के बाद आयोग ने 1991 में हुए 10वीं लोकसभा चुनाव को रद्द कर दिया था।

गोपाल सेन गुप्ता के नाम सब से अधिक जीत का रिकॉर्ड 4 बार चुने गए

बता दें गोपाल सेन गुप्ता पूर्णिया से सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड के नाम है। उन्होंने यहां से 4 बार चुनाव में जीत हासिल की है। गोपाल सेन इस सीट से 1952, 1957, 1962 और 1967 में सांसद बने। मधेपुरा से जन अधिकार पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे पप्पू यादव इस सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं। 1991 में चुनाव रद्द होने के बाद 1995 में हुए उप चुनाव में पप्पू यादव यहां से निर्दलीय सांसद बने। इसके बाद 1996 में एसपी के टिकट पर और 1999 में निर्दलीय चुने गए।

राष्ट्रवाद के मुद्दे से हार गया है रोज़गार और शिक्षा का क्षेत्र

पूर्णिया में रोजगार और विकास का मुद्दा कहीं पीछे रह गया है। यहां पर पार्टियां राष्ट्रवाद के मुद्दे पर एक दूसरे के सामने खड़ी है। लोगों का कहना है कि यहां शिक्षा के क्षेत्र में तो काम हुए हैं, लेकिन रोजगार के लिए पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं। कई प्रखंडों में लोग पानी, बिजली और सड़क जैसे मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं।

लोकसभा का चुनावी विश्लेषण

मुस्लिम बहुल पूर्णिया लोकसभा सीट पर यादव और सवर्ण वोटरों का भी दबदबा है। और कुशवाहा और मुसहर भी गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। पूर्णिया संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 13,05,396 है। इनमें 6,88,182 पुरुष और 6,14,214 महिला वोटर्स हैं।

खास बातें

पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें कस्बा, बनमखनी, रुपौली, धमदाहा, पूर्णिया और कोरहा विधानसभा सीटें शामिल हैं। 2015 विधानसभा चुनाव में 2 सीटें बीजेपी, 2 सीटें जेडीयू और 2 सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं।

 

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