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15 साल से सड़क किनारे फेंके गए तिरंगे समेट रहा शख्‍स , DIG भी कर चुके…

15 साल से सड़क किनारे फेंके गए तिरंगे समेट रहा शख्‍स , DIG भी कर चुके...
समेट रहा शख्‍स : भारत के संविधान में राष्ट्रीय ध्वज और तिरंगे को लेकर कई तरह के प्रावधान हैं। इसके बावजूद अक्सर इनका अपमान होता है। खासकर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर कागज, प्लास्टिक और कपड़े के बने तिरंगे को लोग सडकों के किनारे या कचरे के ढेर में फेंक देते हैं। हालांकि पूर्णिया के अनिल चौधरी पिछले पंद्रह वर्षों से सड़कों पर बिखरे इन तिरंगों को चुनकर उन्‍हें जल में प्रवाहित करते हैं। इसके लिए उन्हें डीआईजी के द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

समेट रहा शख्‍स : डीआईजी के द्वारा हो चुके है सम्मानित

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चौधरी पिछले पंद्रह वर्षों से गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के बाद घूम-घूम कर सडकों के किनारे बिखरे पड़े तिरंगे को चुनते हैं। इस दौरान वे लोगों से तिरंगे का सम्मान करने और उसे जहां-तहां नहीं फेंकने की अपील भी करते हैं। अनिल चैधरी और उनका पूरा परिवार इस तिरंगे को सम्मान के साथ समेटकर उसे तालाब या नदी में प्रवाहित करता है। इसके लिए 26 अगस्त 2016 को तत्कालीन डीआईजी उपेन्द्र प्रसाद सिन्हा ने उनको प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया था। चौधरी का कहना है कि तिरंगा हमारे देश की आन, बान और शान है।आपको बता दें कि इस बार पूर्णिया में अंबेडकर की प्रतिमा के पास काफी मात्रा में तिरंगे कचरे के ढेर में फेंके हुए थे।

क्या कहती हैं अनिल चौधरी की माँ :

अनिल चौधरी की मां गीता देवी कहती हैं कि अनिल के पिता और भाई फौजी हैं। उन्हें यह जज्बा अपने स्वर्गीय फौजी पिता विन्देश्वरी प्रसाद चौधरी से मिला है।वह झंडा चुनकर लाते हैं और उनका पूरा परिवार इस कार्य में उनकी मदद करता है। जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक कहते हैं कि तिरंगा को फेंकना राष्‍ट्र का अपमान होता है। वहीं स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विपुल सिंह कहते हैं कि लोगों को तिरंगे का सम्मान करना चाहिए। जबकि वह प्लास्टिक या कागज से बने तिरंगे पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग करते हैं।

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