Wed. Sep 23rd, 2020

140 साल पहले पूर्णिया छोड़ा था , अब अपनों की मिट्टी की महक ने खींचा

140 साल पहले पूर्णिया छोड़ा था , अब अपनों की मिट्टी की महक ने खींचा
पहले पूर्णिया छोड़ा : 140 साल पहले अंग्रेज एक परिवार को कृषि मजदूर बना कर कोलकाता से सगन नाम की एक नाव में समुद्र से ब्रिटिश गुयाना ले गए। लेकिन मिट्टी का जुड़ाव ऐसा होता है कि उसी परिवार के पारस राम गोवर्धन उर्फ बॉबी अब अपनों की उसे भूमि पर एक बार फिर लौटे हैं। मूल रूप से कनाडा के रहने वाले बॉबी गोवर्धन और उनके पूर्वजों ने मेहनत के बल पर अमेरिका, कनाडा और गुयाना में सोने की खदानों सहित ही ट्रांसपोर्ट का बड़ा व्यवसाय खड़ा कर लिया है। गोवर्धन कनाडा के टोरंटो शहर के वासी हैं। आज भी ये कनाडा में  हिंदू परंपरा को अपने जीवन में समाए हुए हैं। गोवर्धन के साथ ही उनके मित्र और बिजनेस पार्टनर बलदेव सिंह में उनके साथ पूर्णिया पहुंचे। बलदेव लुधियाना के हैं और 1982 में कनाडा गए थे, तभी से बॉबी और उनकी मित्रता है।

पहले पूर्णिया छोड़ा : बॉबी ने बताया कि वे

बॉबी ने बताया कि वे बलदेव के साथ एक समारोह के लिए पंजाब आए थे। लेकिन उन्होंने बलदेव के सामने पहले ही शर्त रख दी थी कि वे अपने गांव जरूर जाएंगे। पंजाब में कार्यक्रम के बाद दोनों पूर्णिया पहुंचे और यहां पर खेती की जानकारी ली। इस दौरान वे किसान हिमकर मिश्र से भी मिले। अब दोनों दोस्त हिंदुस्तान की मिट्टी की महक को समेटकर अपने साथ ले जाना चाहते हैं। बॉबी ने बताया कि वे कृषि के पारंपरिक भारतीय तरीके को आज भी कनाडा में जीवित रखें हैं। उनहोंने बताया कि भारत में कृषि का स्तर काफी उन्नत है और यहां का पर्यावरण, मिट्टी और जनवायु एक तरीके के उपहार है।

पुरखों का घर ढूंढ रहे हैं :

बॉबी अब पूर्णिया में अपने पुरखों का घर ढूंढ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने बंगाल स्पेशल डीजी पुलिस मृत्युंजय कुमार सिंह से भी बात की। मृत्युंजय कुमार ने आश्वस्त किया कि वे पुराना गैजिटियर देखेंगे और सगन नाम की नाव से भेजे गए लोगों की सूची और पता ढूंढ कर संपर्क करेंगे।बॉबी ने कहा कि वे अपने पुरखों के गांव के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं। साथ ही कहा कि भारत की संस्कृति में उनकी विशेष आस्था है। वे पूर्णिया के बाद मगध के इलाके में वैष्णव मत और सूर्योपासना की परम्परा को भी समझने जाएंगे।

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