Sat. Dec 7th, 2019

प्लास्टिक कचरे से बना डीजल-पेट्रोल, जानिए आखिर कैसे किया ये काम

प्लास्टिक को खत्म करने का अभियान चल रहा है। वहीं अब प्लास्टिक कचरे से बना डीजल-पेट्रोल उपयोग में है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा था की ये उपयोग में भी आ सकता है? अब प्लास्टिक हमारे लिए बहुत काम का हो सकता है। यह 11वीं और 12वीं के टैलेंटेड बच्चों ने साबित भी किया है। इन होनहार छात्रों ने ऐसी तकनीक बनायीं है, जिससे प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल, डीजल व पेट्रो केमिकल्स बनाने के साथ ऑयस्टर मशरूम का भी उत्पादन किया जा सकेगा। इन छात्रों के द्वारा बनाई गयी इस तकनीक के लिए बीते सितम्बर में राष्ट्र्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने नेशनल इनोवेशन अवार्ड से सम्मानित किया है। केंद्र सरकार ने लद्दाख में वनस्पति की कमी के साथ प्लास्टिक के ढेर को देखते हुए उन्हें वहां कार्य करने की सलाह भी दी है। इन छात्रों द्वारा किये गए इस काम को काफी सरहाया जा रहा है।

टीम मेंबर्स ने प्लास्टिक कचरे से बना डीजल-पेट्रोल

इस सम्बन्ध में प्रोजेक्ट से जुड़े मुजफ्फरपुर जिले के दामुचक निवासी होलीक्रास में 12वीं के छात्र आशुतोष मंगलम व एमडीडीएम कॉलेज में 11वीं की छात्रा सुरभि गोस्वामी ने बताया कि प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल, डीजल और पेट्रो केमिकल्स तैयार होने के बाद जो कचरा इनमे से बचता है उससे टाइल्स व ईंट भी बन जाती है। प्लास्टिक की बोतलों में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन भी कर सकते हैं। यह सब बस प्लास्टिक के कचरे से तैयार किया जा सकता है।

 

 

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मई के महीने से इस प्रोजेक्ट में काम चल रहा है। प्रोजेक्ट पर काम करने वाली टीम ग्रेविटी एनर्जी रिसर्चर्स के मेंटर कीर्ति भूषण भारती सिवान के रहने वाले हैं। उनकी टीम में मुजफ्फरपुर के आशुतोष मंगलम, सुमित कुमार, मो. हसन, जिज्ञासु, सुरभि गोस्वामी, अमन व विनीत शामिल हैं। इन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री व पेट्रोलियम मंत्री के अलावा पीएमओ ने भी तकनीक की सराहना की है। नई दिल्ली में कई बार प्रदर्शन के बाद प्रोजेक्ट टीम तकनीक को पेटेंट कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जिसे भी प्रोजेक्ट के बारे में बताया जा रहा वो यकीन नहीं कर पा रहा है।

इससे मिलेगा लोगों को रोजगार

टीम मेंबर्स ने बताया कि इस तकनीक से एक टन प्लास्टिक कचरे से 800 लीटर पेट्रोल साथ ही 850 लीटर डीजल और एलपीजी निकाली जा सकती है। जबकि, पेट्रो केमिकल्स 500 लीटर तैयार होंगे तथा एलपीजी भी निकलेगी। टीम के सदस्यों के मुताबिक पेट्रोल, डीजल तैयार करने के लिए कन्वर्जन यूनिट पाइरोलिसिस प्लांट लगाना होगा, जिसे प्रोजेक्ट टीम अपने तरीके से डिजाइन करेगी। बताया कि एक यूनिट लगाने में दो से तीन करोड़ की लागत का अनुमान है। इसमें 50 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और लगभग 22 करोड़ रुपये की कमाई होगी। इसके लिए बिहार के उद्योग मंत्री श्याम रजक ने प्रोजेक्ट टीम को वार्ता के लिए आमंत्रित भी किया है।

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