Mon. Dec 9th, 2019

बिहार की अनोखी शादी : काठ बनता है दूल्हा तो कुआं बनती है दुल्हन

बिहार की अनोखी शादी : काठ बनता है दूल्हा तो कुआं बनती है दुल्हन
बिहार की अनोखी शादी : आज तक आपने कई तरह की शादियां देखी होगी। हर शादी में वर और वधू को भी देखा होगा पर आज हम आपको एक ऐसी शादी के बारे में बता रहे हैं जो अपने आप में अनोखी है। ये ऐसी शादी है जिसके बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना होगा। इस शादी में दूल्हा की भूमिका में काठ यानी लकड़ी था तो दुल्हन है कुआं। आपको सुनकर भले ही अटपटा और पेचीदा  लगा हो लेकिन ये सच है। और आप को मानना भी पड़ेगा क्योंकि ये वाकई में है।

पूरे मंत्रो उच्चारण के साथ शादी होती है सम्पन्न :

इस शादी में दुल्हन बनने वाले कुआं को रंग रोगन कर उसे सजाया गया और काठ को भी दूल्हे की तरह ही सजाया और संवारा गया। इस शादी में वो हर विधि होती है जो दूसरे शादियों में होती है। पंडित ब्रज किशोर पांडेय पूरे मंत्रो उच्चारण से शादी सम्पन करवा रहे हैं।शादी में लड़के वाले भी हैं तो लड़की पक्ष भी-काठ के बने दूल्हे के साथ उसके दोस्त यार भी जो डीजे की तेज धुन पर नाच-गाना करते शादी में शरीक हो रहे हैं।

बिहार की अनोखी शादी : शादी का खर्च :

इस शादी में खाने का भी इंतज़ाम हैं। यूं तो हर शादियों में एक से बढ़ कर एक भोजन बनता है पर इस शादी में बारातियों और सरातियों के लिए चावल, दाल के साथ कद्दू की सब्जी और गर्मा-गर्म पकौड़ों को लोगों के लिए परोसा गया है।बाढ़ के वार्ड नंबर 8 के अम्बेडकर नगर में पिछले 62 सालों से कुआं का विवाह होता आ रहा है। यहां के लोग इसी कुआं से विवाह के बाद अपने घर का सारा पानी का काम करते हैं। वार्ड नंबर 8 के पार्षद पति विक्की इसे मुख्यमंत्री जल संचय योजना से जोड़ते हुए देखते हैं कि कुआं में सफाई और पानी संचय भी होता है।प्रगतिशील नव युवा मंच द्वारा ये विवाह आयोजित होता है। इस शादी में हल्दी ,मड़वा और घृतढ़ारी के बाद पांच दिनों तक चलने वाला वैवाहिक कार्यक्रम भोज के बाद समाप्त हो जाता है। इलाके के लोग इस कुआं के पानी से अपने सभी नये काम की शुरुआत करते हैं। इस शादी का पूरा खर्च वार्ड नंबर 8 के लोग मिलजुल कर उठाते हैं।
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