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लोकसभा में पटना साहिब की आवाज पांच साल तक खामोश रही

पटना साहिब

अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा राजनीतिक हलकों और अन्य मोर्चा पर अब तक मुखर रहते आए उनके 5 साल लोकसभा में बतौर सदस्य बेहद खामोशी से बीते। पटना साहिब लोकसभा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने 2014 से 2019 के कार्यालय में ना तो कोई सवाल पूछा और ना ही किसी चर्चा में हिस्सा लिया यानी लोकसभा में 5 साल खामोश रही पटना साहिब की आवाज। अलबत्ता इस दौरान अपने सांसद निधि फंड का उन्होंने अवश्य खुलकर इस्तेमाल किया।

एक बार फिर शत्रुघ्न सिन्हा लोकसभा चुनाव में पटना साहिब सीट से मैदान में है और इस बार वह बीजेपी के ना होकर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से है। संसद के पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि शत्रुघ्न के संसद के पिछले कार्यकाल मौजूदा के मुकाबले कुछ बेहतर रहे हैं।

खामोश रही लोकसभा में पटना साहिब की आवाज

1996 साल से लेकर 2008 साल तक की अवधि में सांसद रहते हुए वे 92 सवाल पूछे इसके मुकाबले 2009 से 2014 तक के कार्यकाल में उनकी तरफ से 67 सवाल ही पूछे गए हालांकि मौजूदा कार्यकाल में पटना साहिब की आवाज सदन में एकदम खामोश हो गई। इस कार्यकाल में उन्होंने सदन में एक भी प्रश्न नहीं पूछा।

शत्रुघ्न सिन्हा ने संसद में होने वाली एक भी चर्चा में हिस्सा ही नहीं लिया। लगभग इसी तरह का प्रदर्शन चर्चाओं में भाग लेने के संबंध में भी रहा, साल 2006 से साल 2008 तक शत्रुघ्न ने 142 बार सदन में विभिन्न विषयों पर हुई चर्चाओं में हिस्सा लिया अपने अगले कार्यकाल 2019 से 2014 के दौरान  संख्या एकदम नीचे चली गई।

केवल 9 चर्चाओं में शत्रुघ्न सिन्हा ने इस अवधि में भाग लिया लेकिन साल 2014 से 2019 के कार्यकाल में वह इस रफ्तार को भी कायम नहीं रख सके , इस अवधि में बहस में हिस्सेदारी का उनका प्रदर्शन शून्य रहा।

सदन में उपस्थिति बहुत उल्लेखनीय नहीं रही

शत्रुघ्न सिन्हा का सदन में उपस्तिथि को लेकर के भी मौजूदा कार्यकाल बहुत अच्छा नहीं रहा साल 201 से लेकर के साल 2019  तक सदन में उनकी उपस्थिति 75 फीसदी रही लेकिन अपने मौजूदा कार्यकाल में उनकी उपस्थिति का आंकड़ा घटकर 67 फीसद पर आ गया। हालांकि संसद के आंकड़ों के हिसाब से सांसद निधि खर्च के मामले में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है।

शत्रुघ्न सिन्हा अपने मौजूदा कार्यकाल में 22.5 करोड़ राशि व्यय कर चुके हैं जबकि साल 2009 से साल 2014 के 5 साल के कार्यकाल में उन्होंने 19.48 करोड़ की राशि खर्च की थी।

 

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