Sun. Mar 29th, 2020

एनआईटी पटना छात्र को अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी ने दिया 43 लाख का पैकेज

एनआईटी पटना छात्र

बिहार में एनआईटी पटना छात्र को ऊंची उड़ान भरने का मौका मिला है। एनआईटी पटना के इस छात्र को अब तक सबसे हाईएस्ट पैकेज मिला है। इससे पहले किसी को भी इस तरह का ऑफर प्राप्त नहीं हुआ है। अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी ने कंप्यूटर साइंस के छात्र को 43 लाख अधिकतम पैकेज दिया है। छात्र और कंपनी का नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है। हर बार की तुलना में इस बार का पैकेज वाकई ज्यादा है और काबिल छात्र को ये मिलना भी चाहिए।

बहुराष्ट्रीय कंपनी का एनआईटी पटना छात्र को ऑफर

कॉलेज में 2019-20 की प्लेसमेंट प्रक्रिया चल रही है। पिछले साल की तुलना में औसत पैकेज लगभग 65 हजार तथा अधिकतम पैकेज 2।5 लाख रुपये तक बढ़ा है। इससे पहले 2017-18 में मधुबनी में कपड़े की दुकान चलाने वाले मनोज कुमार की बेटी मेधा कुमारी को 39।12 लाख का पैकेज मिला था तथा 2018-19 में भी सीतामढ़ी जिले की रहने वाली नैंसी कुमारी को 40।63 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया गया था। इन छात्रों को जब ये पैकेज मिलता है तब इनकी पूरी मेहनत का ये सही फल होता है। माता-पिता मुश्किलों से फीस देके पढ़ाते हैं और ऐसे छात्र इसकी कदर कर के इतना बड़ा पैकेज अपने टैलेंट से हासिल करते हैं।

 

Image result for ग्रामीण विद्यार्थी

 

 

यह भी पढ़ें-  माँ ने नाबालिग बेटे की हत्या की, घिनौने अपराध में प्रेमी ने दिया महिला का साथ

इस बड़े पैकेज ऑफर के बाद प्लेसमेंट इंचार्ज प्रो सम्राट मुखर्जी का कहना है कि बेहतर ऑफर मिलने का कारण शैक्षणिक वातावरण कंपनियों की जरूरतों के अनुकूल होना है। कंपनी क्या चाहती है, इसकी जानकारी छात्रों को सहज तरीके से उपलब्ध कराई जाती है। इसके अनुसार ही छात्र काम करते हैं। एनआईटी पटना के छात्र ‘कूल वर्क कल्चर’ में सबसे प्राथन स्थान पर रहते हैं। यही कारण आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विश्वास इनपर बना है।

 

Image result for बहुराष्ट्रीय कंपनी का एनआईटी पटना छात्र को ऑफर 

 

हम समझते हैं कि शहर के विद्यार्थी ज्यादा स्मार्ट होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। प्लेसमेंट सेल के अनुसार ग्रामीण विद्यार्थी ज्यादा बेहतर कर रहे हैं। यह देखा गया है कि पिछले दो सालों से अच्छा पैकेज ग्रामीण विद्यार्थियों को ही मिल रहा है। इन्हे लैंग्वेज की प्रॉब्लम से गुजरना पड़ता था, लेकिन इंचार्ज के अनुसार छात्रों को पहले सेमेस्टर में ही गाइड किया जाता है। पहले ही साल में लैंग्वेज प्रॉब्लम दूर कर ली जाती है। बॉडी लैंग्वेज और मार्केट के लिए जरूरी दक्षता में विद्यार्थी दूसरे साल तक खुद को तैयार कर लेते हैं। तीसरे साल से ही छात्रों को नामचीन कंपनियों में एक-एक लाख की स्टाइपेंड इंटर्नशिप के दौरान मिल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *