Sat. Dec 7th, 2019

मधुबनी में महिला की हत्या, पारिवारिक विवाद में महिला को बुरी तरह से पीटा

मुजफ्फरपुर के मधुबनी में महिला की हत्या कर दी गयी है। यह घटना मधुबनी जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के नवनगर चौपाल टोले की है जहाँ आपसी पारिवारिक विवाद में एक 35 वर्षीय इंदु देवी की हत्या कर दी गयी। मामले में तीन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। महिला की हत्या के आरोपितों में पुलिस ने आरोपी मंगल चौपाल, उसकी पत्नी सन्तुलिया देवी और बेटी संजू देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। थानाध्यक्ष गया सिंह ने बताया कि परिजनों के बयान पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी मिलेगी।

दहेज़ बना मधुबनी में महिला की मौत का कारण

मृतिका इंदु देवी नवनगर चौपाल टोले की रहने वाली थी। कुछ महीने पहले ही उसकी बहन की बेटी रिंकी देवी की शादी उसी गांव के बैद्यनाथ चौपाल के बेटे मंगल चौपाल के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद रिंकी का पति कमाने के लिए बाहर चला गया। तभी इस बीच रिंकी भी गर्भवती हो गयी थी। उसके पति के बाहर जाते ही उसके ससुराल वाले दहेज को लेकर उसके साथ मारपीट करने लगे। साथ ही ससुराल वाले उस पर गर्भपात के लिए भी दवाब बनाने लगे। ससुराल वालों के अत्याचार से परेशान रिंकी ने ये बात अपनी मौसी इंदु देवी को बताई। इसपर इंदु देवी उसके ससुराल वालों को समझने के लिए उसक घर गयी।

 

 

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शनिवार को इंदु देवी उसके ससुराल वालों को समझाने लगी तो उन्होंने इंदु के सामने ही रिंकू को मारना पीटना शुरू कर दिया। बीच बचाओ करने आयी इंदु तो तीनों मिलकर उसे ही मारने पीटने लगे। बुरी तरह जख्मी इंदु देवी किसी तरह बचकर थाने पहुंची। जहां पुलिस ने पहले उसको इलाज के लिए रेफरल अस्पताल अंधराठाढ़ी भेज दिया। इंदु देवी की खराब स्थिति देखकर चिकित्सकों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया। इंदु देवी की नाजुक हालत को देखते हुए वहां से भी चिकित्स्कों ने उसे पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। मगर इसी बीच रास्ते मे ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या चल रहा है हमारे समाज में? क्या किसी की ज़िन्दगी से ज्यादा जरुरी दहेज़ है? हर दिन औरतों पर अत्याचार होता रहता है। कभी बलात्कार कर के उन्हें जिन्दा जला दिया जाता है तो कभी दहेज़ के लिए मार पीट के खत्म कर दिया जाता है। कब यह सब बंद होगा? अब तो हर औरत का यही सवाल है, क्या हमें जीना चाहिए?

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