Mon. Oct 18th, 2021

किसानों का झंडा उठा अपना एजेंडा चलाने वाले विपक्षियों पर बरसे मोदी

मोदी

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन यानी सुशासन दिवस पर देश के किसानों से संवाद करने की ठानी और जिस तरह से सरकार के बड़े—बड़े मंत्रियों ने मोर्चा संभाला और देश के अलग—अलग स्थानों पर किसान सम्मेलन में शिरकत किया। पंचायत से लेकर पार्टी दफ्तर तक मोदी के आज के किसान संवाद को सुनने के लिए इंतजामात किये गये थे तो ऐसा लगा था कि दिल्ली के बोर्डर पर धरणा दे रहे किसानों पर सकारात्मक असर होगा। लेकिन ऐसा कुछ होता हुआ नहीं दिखा। न तो उनको पीएम सम्मान निधि का 2000 रूपया रास आया और न ही प्रधानमंत्री का किसान कल्याण के लिए किए जा रहे कामों की लंबी फे​हरिश्त का असर हुआ। फिर भी लोकतंत्र है तो संवाद की प्रक्रिया चलती ही रहनी चाहिए और प्रधानमंत्री बाकी दिनों की तरह आज भी खूब बोले। कभी वे समझाने के मुद्रा में दिखे, तो कभी सुनने के। लेकिन इस बीच प्रधानमंत्री ने विपक्षियों के नियत जम कर हमला और बोला और सवाल खड़ा किए।

क्या कहा प्रधानमंत्री ने

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ योजना की नयी किस्त में नौ करोड़ से अधिक किसानों के लिए औपचारिक रूप से 18,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कांफ्रेस के जरिए देश के किसानों को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश की जनता ने जिन राजनीतिक दलों को नकार दिया है वे अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किसानों को गुमराह कर रहे हैं। किसानों के प्रदर्शन् का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी तब नये कानूनों को लेकर उनकी एमएसपी सहित कुछ वाजिब चिंताएं थीं लेकिन बाद में इसमें राजनीतिक लोग आ गए और उन्होंने किसानों के कंधों पर बंदूक रखकर चलाना आरंभ कर दिया और असंबंद्ध मुद्दों को उठाना आरंभ कर दिया।

मुद्दों से भटक गये

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘‘आपने देखा होगा कि जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी तो उनकी मांग एमएसपी गारंटी की थी। उनके मुद्दे वाजिब थे क्योंकि वे किसान थे। लेकिन अब इसमें राजनीतिक विचारधारा के लोग हावी हो गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘एमएसपी वगैरह को अब किनारे रख दिया गया है। अब वहां क्या हो रहा है। वे हिंसा के आरोपियों की जेल से रिहाई की मांग कर रहे हैं…वे राजमार्गों को टोल-फ्री करवाना चाहते हैं। किसानों की मांग से वह दूसरी मांगों की ओर क्यों चले गए?’’

कृषि बिल को मिल रहा है किसानों का सर्मथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने , ‘‘ऐसी परिस्थिति में भी देशभर के किसानों ने कृषि सुधारों का समर्थन किया है… भरपूर समर्थन किया है और स्वागत किया है। मैं सभी किसानों का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें भरोसा दिलाना चाहता हूं कि आप के विश्वास पर हम कोई आंच नहीं आने देंगे।’’ मोदी ने आरोप लगाया कि किसानों के आंदोलन का इस्तेमाल कई अन्य मौजूदा नीतियों के विरोध के लिए भी किया जा रहा है।

गुमराह करने में लगे अन्य दल

प्रधानमंत्री ने बिना किसी राजनीतिक दल या समूह का नाम लिये हुए कहा कि जिनके राजनीतिक एजेंडे हैं वे किसानों को सरकार के साथ वार्ता नहीं करने दे रहे हैं जिससे कि उनकी चिंतायें दूर की जा सकें। उन्होंने विपक्षी दलों पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उनपर जमकर निशाना साधा। उल्लेखनीय है कि हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर लगभग एक महीने से इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार के साथ किसानों की पांच दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन गतिरोध टूट नहीं सका।

उन्होंने क​हा कि ‘आज हर किसान को पता है कि उसे उसकी उपज के लिए अच्छा दाम कहां मिलेगा? इन कृषि सुधारों के साथ किसान अपनी उपज को कहीं भी किसी को भी बेच सकता है। किसानों को फायदा पहुंचाने में क्या गलत है?’

चर्चा नहीं कृषि बिल वापसी की है मांग

सरकार कानूनों के प्रावधानों में संशोधनों को लेकर चर्चा करने का तैयार है लेकिन किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पीएम-किसान योजना लागू न करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की तीखी आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि जहां तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं पश्चिम बंगाल में इस योजना को राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वित न किए जाने पर वहां कोई आंदोलन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरे हिंदुस्तान के किसानों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। सभी विचारधारा की सरकारें, इससे जुड़ी हैं लेकिन लेकिन एकमात्र पश्चिम बंगाल है जहां के 70 लाख से अधिक किसान इस योजना के लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उनको यह पैसे नहीं मिल पा रहे हैं, क्योंकि बंगाल की सरकार अपने राजनीतिक कारणों से इसे लागू नहीं कर रही है।’’

मिल रहा है किसानों का समर्थन

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों को भारत सरकार से पैसा जाने वाला है और इसमें राज्य सरकार का कोई खर्चा नहीं है फिर भी उन्हें इस लाभ से वंचित रखा जा रहा हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई किसानों ने भारत सरकार को इसके लाभ के लिए सीधी चिट्ठी भी लिखी है लेकिन राज्य सरकार उसमें भी रोड़े अटका रही है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘देश में 80 प्रतिशत से अधिक गरीब किसान हैं, पिछली सरकारों के दौरान ये किसान और अधिक गरीब हुये हैं, इन्हीं गरीब किसानों की स्थिति को देखते हुये कृषि सुधार जरूरी हो गये थे।’

अनुबंध खेती को लेकर फैलाया जा रहा है भ्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ पार्टियां नये कृषि कानूनों का विरोध कर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। कुछ लोग यह भ्रम और झूठ फैला रहे हैं कि यदि किसान अनुबंध खेती करेंगे तो उनकी जमीन चली जायेगी। उन्होंने यह भी कहा, ‘जो लोग केरल में कई साल से राज कर रहे हैं वही लोग पंजाब में किसानों के साथ सेल्फी खिंचाने के लिये पहुंच रहे हैं, लेकिन इन लोगों ने अपने राज्य (केरल) में मंडी प्रणाली के लिये कुछ नहीं किया।’ मोदी ने कहा कि कुछ लोग किसानों की जमीन को लेकर चिंता जताने का नाटक कर रहे हैं, हम उन सभी के बारे में जानते हैं जिनके नाम जमीन पर कब्जा करने को लेकर मीडिया में आ चुके हैं।

मतदाता द्वारा नकारे गये लोग कर रहे हैं साजिश

उन्होंने कहा जिन लोगों को मतदाताओं ने नकार दिया अब वही लोग प्रचार पाने के लिये नये नये कृत्यों में लगे हैं लोगों को इनके भ्रमजाल में नहीं फंसना चाहिये। उन्होंने कहा, ‘हमने एक हजार से अधिक मंडियों को आनलाइन एक दूसरे से जोड़ा है, इन मंडियों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार पहले ही हो चुका है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘हम गांवों में किसानों के जीवन को आसान बना रहे हैं। जो लोग आज बड़े बड़े भाषण दे रहे हैं जब वह सत्ता में थे तब उन्होंने किसानों के लिये कुछ नहीं किया।’ उनकी सरकार ने और अधिक फसलों को नयूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिया और किसानों को रिकार्ड धनराशि उपलब्ध कराई है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बिहार एक्सप्रेस ताज़ा ख़बरें