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बिहार की मधुबनी पेंटिंग – मनीषा झा ने अपने हुनर से खड़े किए कई कलाकार

बिहार की मधुबनी पेंटिंग

बिहार की मधुबनी पेंटिंग के पीछे कई कलाकारों के हाथ हैं। आज नारी शक्ति मिल के अपनी पूरी फौज बना के पेंटिंग बना रही है। स्वावलंबन की राह पर दस हजार महिला कलाकार। यह सारी महिलाएं मधुबनी पेंटिंग सीखकर हर साल करीब 70-80 हजार रुपये कमेटी हैं। यह सब काम शुरू करने वाली पचास वर्ष की मनीषा झा है। जो इन्हे तीन महीने की निशुल्क ट्रेनिंग देकर योग्य और आत्मनिर्भर बनाने का काम करती हैं। इसमें विदेश की भी महिलाएं जुड़ी हैं। उनका यह अभियान 17 सालों से जारी है। पूरी मेहनत और लगन से सब मिल क काम करती हैं।

मनीषा झा ने हुनर से सामने आयी बिहार की मधुबनी पेंटिंग

रहिका प्रखंड के सतलखा की रहने वाली मनीषा झा ने दादी और मां से पेंटिंग बनाना सीखा था। इन्होने आर्किटेक्ट में इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला लिया। मनीषा झा बिस्फी के भोजपंडौल गांव के अजीतेश झा से शादी के बाद वह दिल्ली पहुंची तो वहीं इस कलाकारी में जुट गयी। इस कला को उन्होंने हर जगह पहचान देने का काम किया। पहली बार वर्ष 1998 में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, दिल्ली में उनकी प्रदर्शनी लगी। वहां लोगो ने इसे अच्छे से जाना। इसमें सफलता के बाद ललित कला एकेडमी ने प्रदर्शनी लगाने के लिए आमंत्रित किया।

 

 

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मनीषा झा ने वर्ष 2002 में दिल्ली में मधुबनी आर्ट सेंटर की स्थापना की और वहां महिलाओं को ट्रेनिंग देने लगीं। इधर, जिले में अपने घर एवं चकदह में गरीब परिवार की महिलाओं को भी ट्रेनिंग देती हैं। वह हस्तशिल्प मंत्रालय भारत सरकार, इंटरनेशनल फोकाट मार्केट, दुपट्टा इंटरनेशनल, एसेल म्यूजियम के माध्यम से देश-विदेश में 151 प्रदर्शनियां लगाने के साथ प्रशिक्षण देने का काम कर चुकी हैं। वह मॉरिशस, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, स्विटजरलैंड, रूस व फ्रांस सहित अन्य देशों में जा चुकी हैं। मनीषा झा महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है।

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