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मधेपुरा की फाइट : तीन दिग्गजों की इज़्जत दांव पर

मधेपुरा की फाइट

मधेपुरा की फाइट : कभी मधेपुरा लोकसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को हराने वाले शरद यादव इस बार राजद के झंडे पर मैदान में हैं। उन्हें एनडीए के दिनेशचंद्र यादव और जन अधिकार पार्टी (जेएपी) के पप्पू यादव से कड़ी टक्कर मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि मधेपुरा लोकसभा सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है।

मधेपुरा की फाइट : पप्पू यादव की चाहत

पप्पू यादव ने गठबंधन में शामिल होने की पूरी कोशिश की लेकिन तेजस्वी के विरोध के कारण वह शामिल नहीं हो सके। इससे नाराज होकर पप्पू यादव ने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। पप्पू यादव के चुनाव के कारण मधेपुरा की फाइट त्रिकोणीय हो गई है। इस सीट पर मतदान 23 अप्रैल को होना है।

मधेपुरा की फाइट : 2014 में मोदी लहर के बावजूद, इस सीट पर भाजपा हार गई थी। आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे पप्पू यादव ने जेडीयू उम्मीदवार शरद यादव और बीजेपी के विजय कुमार सिंह को हराया था। इससे पहले, 2004 में लालू यादव के इस्तीफे के बाद, पप्पू यादव ने इस उपचुनाव में शरद यादव को हराया था। ओबीसी वोटबैंक को देखते हुए एनडीए ने इस बार जदयू के उम्मीदवार को उतारने का फैसला किया है।

सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड शरद यादव को 4 बार दिया गया। मधेपुरा से शरद यादव के नाम सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड है। वे यहां से चार बार सांसद चुने गए। शरद यादव, जो मध्य प्रदेश में रह रहे थे और बिहार को अपनी राजनीतिक जमीन बना रहे थे, 1991 में जनता दल के टिकट पर लोकसभा पहुंचे। वे 1996, 1999 और 2009 में भी चुने गए। 1999 में शरद ने लालू प्रसाद को लगभग 30 हजार वोटों से हराया। हालांकि, शरद को इस सीट से चार बार हार का सामना करना पड़ा है। 1998 में, लालू प्रसाद और 2004 में (उपचुनाव), 2014 में पप्पू यादव ने शरद यादव को पटखनी दी।

मधेपुरा की फाइट : अटल सरकार में मंत्री रहे शरद यादव ने जदयू से अलग होने के बाद लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया। जेडी (यू) के गठबंधन को छोड़ने और फिर से भाजपा के साथ सरकार बनाने के चलते शरद नीतीश से बहुत नाराज थे।

इसी के चलते शरद ने नई पार्टी बनाई और महागठबंधन में शामिल हो गए। महागठबंधन में सीटों के बंटवारे में शरद यादव को एक सीट मिली और यह तय हुआ कि वह राजद के चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे। चुनाव के बाद, उनकी पार्टी का विलय राजद में हो जाएगा।

यादव बहुल मधेपुरा सीट पर मुस्लिमों और सवर्णों का भी दबदबा है। मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में करीब 22 फीसदी यादव, 13 फीसदी मुस्लिम, 19 फीसदी सवर्ण, 14 फीसदी दलित, 11 फीसदी कुशवाहा और 21 फीसदी वैश्य समुदाय के लोग हैं। इस सीट पर 18,84,216 मतदाता हैं जिनमें 9,74,722 पुरूष और 9,07, 592 महिला वोटर्स हैं।

एक तरफ राष्ट्रवाद जबकि दूसरी तरफ जातीय मुद्दों पर चुनाव लड़ा जा रहा है। कोसी नदी के चलते हर साल बाढ़ की वजह से होने वाली तबाही भी किसी राजनीतिक पार्टी के लिए बड़ा मुद्दा नहीं। रोजगार के लिए मधेपुरा में एक रेलवे फैक्ट्री बनकर तैयार हुई है लेकिन यहां अब तक काम शुरू नहीं हो सका। यही वजह है कि हर साल यहां से सैकड़ों लोग रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर है। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए यहां मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज बनाए गए लेकिन अब तक पढ़ाई शुरू नहीं हुई है। तीन दिग्गजों की इज़्जत दांव पर है मधेपुरा की फाइट में और अंतिम फैसला जनता को करना है

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