Sat. Dec 7th, 2019

गीतकार संतोष आनंद की प्रेम कहानी, इतनें सालों बाद मिली बिछुड़ी प्रेमिका

गीतकार संतोष आनंद की प्रेम कहानी

गीतकार संतोष आनंद की प्रेम कहानी जान के आपको भी प्यार पर भरोसा हो जायेगा। बहुत कम लोग ये जानते होंगे की इन्होने ”इक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है…” जैसे बहुत ही प्यारा गाना अपनी प्रेमिका के लिए लिखा था। उनकी प्रेमिका कालक्रम में उनसे बिछड़ गयी थीं। सालों इंतज़ार करने के बाद उनकी प्रेमिका उनसे 50 साल बाद फिर मिलेंगी इसका यकीन तो उन्हें भी नहीं था। सुनने में ये एक फिल्मी कहानी लग रही है, लेकिन ये एक सच है। बॉलीवुड फिल्‍मों जैसी यह कहानी 84 साल के हो चुके संतोष आनंद के जीवन की हकीकत है। इसका राज उन्‍होंने पटना में खोला। उन्होंने अपनी प्रेम कहानी को बताया है।

फिल्मी है गीतकार संतोष आनंद की प्रेम कहानी

बॉलीवुड सिनेमा में इन्होने एक सेक गाने दिए हैं, जिसे आज भी लोग सुनते हैं और गुनगुनाते हैं। संतोष जी ने बहुत से हिट गाने दिए हैं। ये बीते दिनों पटना आये हुए थे। यह एक कवी सम्मलेन के कार्यक्रम में शामिल होकर इन्होने अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा राज खोला है। उन्‍होंने बताया कि गीत ‘इक प्‍यार का नगमा है…’ उन्‍होंने अपनी प्रेमिका के लिए लिखा था। यह भी बताया कि उनकी प्रेमिका उनसे बिछुड़ गई थी।

 

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इतने लम्बे समय तक उन्होंने अपनी प्रेमिका का इंतज़ार किया। संतोष ने बताया कि उम्र के 84 बसंत पार कर चुके संतोष आनंद ने बताया कि कुछ साल पहले उसी प्रेमिका ने फोन किया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्‍हें तो लगता था कि वह शायद अब इस दुनिया में ही नहीं हो। लेकिन इतने लम्बे अरसे 50 साल के बाद अब वह फिर मिली है। सब तो बताया लेकिन उन्‍होंने प्रेमिका का नाम तो नहीं बताया, लेकिन इतना जरूर कहा कि वह पुणे में रहती है त‍था वहां से बराबर फोन करती है। उनकी प्रेमिका से बात भी होती है।

 

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संतोष आनंद ने दिया पटना को नया नाम

गीतकार संतोष आनंद ने पटना की और वहां के लोगों की बहुत तारीफ की साथ ही पटना को एक नया नाम भी दिया है। कहा कि यहां के लोग इतने अच्‍छे हैं कि इस शहर का नाम ‘पटना’ के बदले ‘पटजा’ होना चाहिए था। कवी सम्मलेन में शामिल होकर उन्होंने ख़ुशी जाहिर की है। एक बहुत ही ख़ास बात कही संतोष जी ने बुजुर्गो के लिए कहा कि वे उम्र नहीं, हौसले से जिएं। अपनी बात करते हुए ह्वील चेयर पर बैठे संतोष आनंद ने कहा कि भले ही उनका शरीर साथ नहीं दे रहा है, लेकिन वे हौसलों के बल पर बेहतर ढ़ंग से जी रहे हैं। इन्होने जीना का तरीका सीखा दिया।

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