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कन्हैया कुमार को नहीं मिला बिहार महागठबंधन में भाव, तेजस्वी यादव ने रोकी बेगूसराय से एंट्री

बिहार महागठबंधन

-Pratiksha Tripathi

शुक्रवार को बिहार महागठबंधन ने सीटों के बंटवारे का ऐलान कर दिया लोकसभा की 40 सीटों में से 20 पर आरजेडी लड़ेगी और 9 सीट मिली है कांग्रेस को। प्राप्त जानकारी के अनुसार कन्हैया कुमार जो कि छात्र राजनीति से लोकसभा का चुनाव लड़ने का इरादा रखने वाले हैं उन्हें महागठबंधन ने किनारा कर लिया है। बताया जा रहा है कि कन्हैया का टिकट काटने में किसी और का नहीं बल्कि तेजस्वी यादव का ही हाथ है।

कन्हैया कुमार बिहार के बेगूसराय से बिहार महागठबंधन के उम्मीदवार हो सकते हैं पहले ऐसी खबर आ रही थी। कन्हैया कुमार बेगूसराय से चुनाव लड़ेंगे ऐसा उन्होंने खुद कहा था।

बिहार महागठबंधन में कठिन सीटिंग फार्मूला

अब तो सीटों के बंटवारे से साफ हो गया है कि कन्हैया कुमार को बिहार महागठबंधन  का साथ नहीं मिलने वाला है। बेगूसराय सीट आरजेडी के हिस्से में आई है और आरजेडी अपने कोटे से 1 सीट पहले ही सीपीआई एम को दे चुकी है। जहां सीपीआई ने पहले यह ऐलान किया था कि उसे बिहार में 3 से 4 सीटें चाहिए पर सीटों के बंटवारे के वक्त सीपीआई को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। इस बात से नाराज सीपीआई के राज्य सचिव नारायण सिंह ने खुद कहा कि महागठबंधन ने हमारे साथ धोखा किया है।

उनका कहना है कि 1 साल पहले महागठबंधन का वादा हुआ था। मैं लालू यादव से 3 बार मिला भी था और उनसे फोन पर बात भी हुई थी साथ ही साथ तेजस्वी से भी बात हुई थी उन्होंने गठबंधन का आश्वासन दिया था। राजद के राज्य अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे और नेता तनवीर हसन ने 25 अक्टूबर की रैली में कहा था कि हमें साथ मिलकर लड़ना चाहिए लेकिन अब वह सब अलग हो गए हैं।

नारायण सिंह ने एक बार फिर कहा कि उनकी पार्टी बेगूसराय से चुनाव लड़ना चाहती है और कन्हैया और सीपीआई गठबंधन या बिना गठबंधन के लड़ने को तैयार थे। उनका कहना है कि भले ही उन्होंने हमें बाहर कर दिया लेकिन हम बेगूसराय से लड़ेंगे और हमारी पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। सीपीआई अब मधुबनी मोतिहारी और खगड़िया से भी प्रत्याशी उतार सकती है।

सूत्रों ने बताया कि आरजेडी इसके पक्ष में नहीं था वरना कांग्रेस वामदलों का साथ रखना चाहती थी। बता दे कि युवा वामपंथी नेता कन्हैया कुमार उस समय खबरों में आए थे जब उन्हें एक रैली में भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में राजद्रोह के तहत गिरफ्तार किया गया था।

कन्हैया कुमार देश में एक नई वाम राजनीति के चेहरे के रूप में उभरे हैं जिन्हें उनके उग्र भाषणों के कारण भी जाना जाता है और यही कारण है कि वह काफी मशहूर भी हुए हैं। कन्हैया की छवि ही उनके राजनीतिक कैरियर के आड़े आ रही है। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी के निदेशक संजय कुमार ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे कांग्रेस गठबंधन कन्हैया कि इस इमेज से बच रहा है।

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