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तेजस्वी पर जीतन राम मांझी का वार कहा – “विधानसभा सत्र से ही लक्षण सही नहीं लग रहे थे” , आखिर क्यों कहा ऐसा ?

जीतन राम मांझी का वार

तेजस्वी पर जीतन राम मांझी का वार : बिहार की 5 सीटों पर होने को लेकर एनडीए बनाम महागठबंधन की स्थिति बिल्कुल नहीं है क्योंकि महागठबंधन में ही फूट होती दिख रही है। महागठबंधन में उठापटक के बीच हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने राजद के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव पर बहुत बड़ा निशाना साधा है। उपचुनाव को लेकर कटिहार के आजमनगर में कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान हम पार्टी के सुप्रीमो ने कहा कि विधानसभा सत्र के बाद से ही उनको तेजस्वी यादव केलक्षण सही नहीं लग रहे थे उन्होंने तेजस्विता को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर रखने का आरोप भी लगा दिया।

जीतन मांझी की नाराजगी और हमले करने के पीछे साफ वजह है बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल द्वारा की गई घोषणा। अपने उम्मीदवारों को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने बुधवार को ऐलान किया कि वह बिहार में होने वाले 5 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों को खड़ा करेगी और उन्हें पार्टी का सिंबल भी दे दिया गया है। यह सीटें हैं नाथ नगर, बेलहार , सिमरी, बख्तियारपुर और दरौंदा। इसके बाद से महागठबंधन के अन्य सहयोगियों में नाराजगी उतर आई है।

 

तेजस्वी पर जीतन राम मांझी का वार : महागठबंधन में सब है नाराज़ , वजह है राजद का आगे-पीछे होना !

मांझी ने सम्मेलन में आगे बोलते हुए इसी मुद्दे पर कहा कि उपचुनाव में वीआईपी और हम एक दूसरे की मदद करेंगे यह तय हो चुका है और फिर एक बार महागठबंधन के सभी साथियों के साथ बातचीत कर एनडीए के खिलाफ एकत्रित होने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि भागलपुर के नाथनगर से अजय राय को चुनाव प्रत्याशी बनाने की घोषणा और नेताओं से चर्चा कर की गई थी लेकिन राजद ने बिना जानकारी दिए अपने प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतार दिया। जीतन राम मांझी ने दावा किया कि वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और रालोसपा चीफ उपेंद्र कुशवाहा तेजस्वी यादव से नाराज़ हैं।

तेजस्वी यादव को विपक्ष के सीएम चेहरे के तौर पर पेश किये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि तेजस्वी उनको निजी पर पसंद है लेकिन गठबंधन को ही आखिरी फैसला लेना है। सहयोगियों की नाराज़गी के पीछे कारण है यह है कि असल में राजद खुद को मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में दिखाना चाहती है। पार्टी के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने इस बाबत बयान भी दिया था कि हम सहयोगियों को याद दिलाना चाहते हैं कि राजद कितनी मज़बूत है।

 

 

जीतन राम मांझी का वार बेमतलब नहीं

 

सहयोगियों में गुस्सा फूटा तो राजद ने अपना स्टैंड थोड़ा सा चेंज किया और कांग्रेस को अपने उम्मीदवार खड़े करने की छूट देने की बात कही और एक कूटनीतिक बयान दिया कि वह चाहते हैं कि कांग्रेस मजबूत हो जाए और यह अच्छी बात है लेकिन वह राज्य में सहयोगियों के बिना मजबूत नहीं बन सकती।

फिलहाल मौजूदा उपचुनाव को लेकर जहां बिहार की एक सीट पर हम ने दावा ठोक दिया है तो वहीं कांग्रेस ने 5 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है। जबकि रालोसपा चुनाव नहीं लड़ रही है। ऐसे में एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है इन सम्भावनाओ के बीच कि क्या राजद सहयोगियों को मनाने में कामयाब होगी , लेकिन फिलहाल सभी पार्टियां अलग-अलग सीटों पर अपने उम्मीदवारों को खड़ा करेगी यही तस्वीर है जिससे कुल मिलाकर लाभ केवल एनडीए को होना है।

 

 

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