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जमुई का खतरनाक स्कूल जहाँ सिर्फ दो कमरों में पढ़ते हैं 400 बच्चे ! जानिये अंदर की बात

जमुई का खतरनाक स्कूल

जमुई का खतरनाक स्कूल : क्या आप खतरनाक स्कूल के बारे में जानते हैं? अगर नहीं तो बिहार के जमुई का खतरनाक स्कूल आपके अंदर विचलन की भावना को बढ़ा देगा ! राज्य सरकार के अधीन आने वाला शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने का पुरुष और दावा करता है लेकिन जमीनी हकीकत सब जगह एक ही नहीं है आज भी कई एक सरकारी स्कूल है जो कमरों और भवन के बिना ही चल रहे हैं.

जमुई जिले के बरहट प्रखंड के भलुका मध्य विद्यालय मात्र दो कमरों का है. यह स्कूल अपने आप में खतरनाक भी है और अनोखा भी क्योंकि स्कूल में वर्ग 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है और कुल 400 बच्चे इसी में पढ़ते हैं.

इन चार सौ बच्चों में से करीब 90% बच्चों की उपस्थिति प्रतिदिन रहती है लेकिन पढ़ने-पढ़ाने के लिए के पर्याप्त संसाधन नहीं है. इसी का दुष्परिणाम है कि बच्चे या तो पेड़ के नीचे नहीं तो बरामदे में ही पढ़ने को मजबूर है. 50 साल पहले स्कूल की स्थपना की गई थी लेकिन तब से लेकर आज तक सिर्फ मांगे ही उठी उसे पूरा कभी नहीं किया गया.

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जमुई का खतरनाक स्कूल : शासन-प्रशासन के कान में मानो जूँ तक नहीं रेंगती

शासन-प्रशासन के कान में मानो जूँ तक न रेंगती हो ऐसे में केंद्रीय और राज्य में शिक्षा मंत्री रह चुके जय प्रकाश नारायण यादव को भी शायद ही यहाँ की हालत का अंदाजा होगा. वास्तव में देखे तो कोई भी ऐसे स्कूल में पढ़ नहीं सकता है फिर भी गरीब को लाचारी में अपने बच्चे को यहाँ भेजना पड़ता है.

भलुका गांव के इस खतरनाक स्कूल में क्लास चल सके इसके लिए छुट्टी का इंतजार करना पड़ता है क्योंकि यहां करीब 400 बच्चे हैं और उनमें से 90% उपस्थित होते हैं कमरे का अभाव यहाँ सभी की शिक्षा को असंभव सा बना देता है.

स्कूल परिसर का जो पेड़ है, वहां पर कक्षा 12 के बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं. बरामदे में ही दोपहर का भोजन बनता है, वहां कक्षा एक से तीन के बच्चे पढ़ाई करते हैं, वहीं दूसरे बरामदे में बच्चे बैठकर पढ़ते हैं. मिड डे मील बनाने के लिए गैस कनेक्शन तो है लेकिन एक शेड नहीं है जिससे खुले में ख़राब सा खाना पकता है और यहाँ तक इसमें से 3 दिन बार सांप भी निकल चुके हैं. लगता है मौतों से पहले यहाँ का प्रशासन इस खतरनाक स्कूल को पढ़ने लायक स्कूल में तब्दील नहीं होने देगा.

 

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