Sat. Jul 4th, 2020

मैट्रिक की परीक्षा में हिंमाशु राज को मिला सर्वोच्च स्थान

मैट्रिक की परीक्षा

पटना: गरीबी, गुदड़ी, और इसी गुदड़ी में पले-पढ़े लाल। लाल भी कमाल के। कोई सब्जी बेचने वाले की गोद मे पला तो कोई खेती किसानी करने वाले की बाहों में बड़ा हुआ। कोई मजदूरी करने वाले पिता की गोद में लेकिन तमाम तरह की तंगियों के बावजूद अपनी प्रतिभा की बदौलत  तंगी के तांगे पर बैठक कर सफलता की सीढ़ियों पर सैर को निकल पड़ा। इनमें से किसी ने हार नहीं मानी और पढ़ाई की बदौलत कुछ करने की ठानी। जी हां, य​ह किस्सा है बिहार बोर्ड ने मैट्रिक की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान पाने वाले उन विद्यार्थियों की जिन्होंने एक बार फिर से साबित कर दिया कि मंहगी होती शिक्षा के इस दौर में भी गुदड़ी में लाल पैदा हो सकते हैं।

हिमांशु राज ने टॉप किया मैट्रिक परीक्षा

मैट्रिक की परीक्षा

सबसे पहले चर्चा करते हैं बिहार बोर्ड के मैट्रिक परीक्षा के टॉपर बने हिमांशु राज की। हिमांशु ने 96.20 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उन्हें 481 नंबर मिले हैं। बिहार टॉपर हिमांशु राज रोहतास जिले के दिनारा प्रखंड के तेनुअज पंचायत के नटवार कला गांव के निवासी हैं। उनके पिता सुभाष सिह सब्जी बेचकर और खेती किसानी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते है। माता मंजू देवी कुशल गृहिणी है। हिमांशु के किसान पिता के पास खुद की पर्याप्त जमीन नहीं है। वे दूसरे के खेत को पट्टा पर लेकर खेती करते हैं। बेटे की सफलता से प्रसन्न सुभा​ष सिंह ने बताया कि  कई बार तो पढ़ाई के दौरान आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण परेशानी भी हुई, लेकिन किसी तरह से पढ़ाई जारी रहा।  इसने हमारा सपना पूरा कर दिया। हम सब हमेशा यही कोशिश करते थे कि बेटे को पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं हो। मां भी कभी कोई काम नहीं कहती थी ताकि बेटा अच्छे से पढ़ाई कर सके। मां-बाप का कहना है कि बेटा आगे जो भी करना चाहता है, उसका पूरा सपोर्ट करेंगे। वहीं  टॉपर बनने के बाद हिमांशु ने कहा कि कोचिंग के साथ पापा भी पढ़ाई कराते थे। घर में 14 घंटे की पढ़ाई करते थे, जिसके बाद आज वह टॉप आए हैं। हिमांशु ने कहा कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। इसको लेकर वह आगे भी कड़ी मेहनत करेंगे।

दूसरे टॉपर बने दुर्गेंश के पिता करते हैं खेती—किसानी

बिहार बोर्ड के मैट्रिक परीक्षा दूसरे स्थान पर रहे दुर्गेश कुमार समस्तीपुर के उजियारपुर थाना क्षेत्र के एसके हाई स्कूल जितवारपुर के छात्र हैं।   उनका गांव मालती के समीप स्थित बिदुलिया है। दुर्गेश कुमार 480 अंक प्राप्त हुआ है। पेशे से किसान दुर्गेश के पिता जयकिशोर सिंह अपने पुत्र की सफलता से खासे उत्साहित हैं। दुर्गेश चार भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। दुर्गेश के पिता खेतीबारी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। परीक्षा परिणाम के विषय में दुर्गेश ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे उसके माता पिता का योगदान महत्वपूर्ण है। मां-पिता की प्रेरणा से ही उन्हें इतनी बड़ी सफलता मिली है।  वे आईआईटी कर एक कुशल इंजीनियर बन देश की सेवा करना चा​हते हैं।

तीसरे स्थान पर एक छात्रा और दो छात्र

बिहार के टॉप-3 टॉपरों की सूची में एक छात्रा ने कब्जा जमाया है। छात्रा जूली कुमारी को 478 अंक हासिल हुए हैं। अरवल जिले की रहने वाली जूली ने बालिका हाई स्कूल से पढ़ाई की है।वहीं दो अन्य छात्र हैं भोजपुर जिले के हरखेन कुमार जैन के पुत्र शुभम कुमार को भी 478 अंक ही मिले हैं। इसके अलावा औरंगाबाद के रहने वाले राजवीर सिंह को भी 478 अंक ही मिले। राजवीर पटेल हाई स्कूल के छात्र हैं।

मुन्ना के पिता करते हैं मजदूरी,  बेटे को मिला चौथा स्थान

दाउदनगर पटवा टोली निवासी गोपाल प्रसाद के पुत्र मुन्ना कुमार ने मैट्रिक परीक्षा में राज्य भर में चौथा स्थान प्राप्त किया है। उन्हें कुल 477 अंक मिले हैं। मुन्ना बेहद गरीब परिवार से हैं और इनके माता—पिता मजदूरी करते हैं। इतना ही चार भाईयों और दो बहनों के परिवार में पले बढ़े मुन्ना के परिवार केवल मुन्ना ही ऐसे हैं जिन्होंने 10 वीं पास किया है। भाई मनोज, योगेंद्र और विनय तीनों मजदूरी करते हैं। बहन चंद्रावती और मलती घर का काम संभालती है।  मुन्ना की सफलता पर पिता गोपाल प्रसाद काफी खुश हैं। आठ घंटे की सेल्फ स्टडी और कोचिंग के जरिए इस मुकाम पर पहुंचे मुन्ना का मानना है कि मेहनत के अलावा सफलता की कोई सीढ़ी नहीं है।

वे आगे पढ़ाई कर आईएएस बनना चाहते हैं।  मुन्ना ने सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, भाई बहन के अलावा शिक्षकों को दिया है।

इसके बात पांचवें स्थान पर रोहतास के रहने वाले रंजीत कुमार गुप्ता रहे हैं। रंजीत को कुल 476 अंक हासिल हुए हैं. छठवां स्थान अररिया के रहने वाले अंकित राज ने हासिल किया है। अंकित ने इस परीक्षा में कुल 475 अंक हासिल कर मां-बाप का नाम रोशन किया है।

छठा स्थान दीपांशु प्रिया

किसान उच्च विद्यालय, मोरसंड की छात्रा और समस्तीपुर प्रखंड के चकहाजी (रूप नारायणपुर बेला पंचायत) निवासी संजीव कुमार राम व विनीता कुमारी की पुत्री दीपांशु प्रिया ने मैट्रिक की परीक्षा में राज्य में छठा रैंक प्राप्त किया है। उनके पिता गांव मे ही किराना की छोटी सी दुकान चलाते हैं। वहीं उनकी मां जीविका में सीएनआरसी के पद पर कार्यरत है। दीपांशु का कहना है कि वे आगे चलकर आईएएस अफसर बनना चाहती है। इसके साथ ही उनकी यह सफलता   शिक्षकों, स्वाध्याय और माता पिता के सहयोग से प्राप्त हुआ है।

मां आगनवाड़ी सेविका, बेटे को मिला सातवां स्थान

उल्लेखनीय है कि 474 अंक के साथ सातवें स्थान प्राप्त करने वाले शशि कुमार एसपी हरिजन उच्च विद्यालय जगदर का छात्र शशि कुमार को 474 अंक आया है। शशि कुमार के पिता अमरदीप महतो की 10 साल पूर्व सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जबकि इसकी मां शर्मिला कुमारी आंगनवाड़ी सेविका के पद पर कार्यरत हैं। रिजल्ट आने के बाद उसके मां और दादा की खुशी का ठिकाना नहीं है।

हेमंत को मिला नौवां स्थान, पिता हैं शिक्षक

हुलासगंज प्रखंड के सूरजपुर गांव के हेमंत जिनके पिता पेशे से शिक्षक अरुण कुमार और माता बबली कुमारी आंगनवाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत हैं ने राज्य भर में नौवां स्थान प्राप्त कर परिवार, गांव और जिले को गौरवान्वित होने का मौका दिया है। पिता के शिक्षक होने के कारण घर में पढ़ाई लिखाई का माहौल मिला तो परीक्षा में 472 अंक लाकर सूबे में 9वीं रैंक हासिल करने में सफलता पाई।  हुलासगंज उच्च विद्यालय के छात्र हेमंत ने कहा कि उसे शुरू से ही उम्मीद थी कि परीक्षा में 95 फीसदी के करीब अंक आएंगे। वे आगे चलकर मेडिकल की परीक्षा पास कर डॉक्टर बनना चाहते हैं। बेटे की सफलता से अभिभूत पिता अरुण कुमार बताया कि महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप कितना घंटा पढ़ते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण है कि आप कितनी गंभीरता से पढ़ते हैं और चीजों को कितना समझ पाते हैं।

उल्लेखनीय है कि बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने इस बार 14 लाख 94 हजार 71 विद्यार्थी सम्मलित हुए थे। इनमें से 7 लाख 29 हजार 213 छात्राएं थीं। इस बार कुल 80.59% विद्यार्थी पास हुए हैं। इनमें से 4,03,392 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में, 524217 सेकेंड डिवीजन से और 2,75,402 थर्ड डिवीजन से पास हुए हैं। कुछ 12 लाख 2 हजार, 30 विद्यार्थी पास हुए हैं।

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