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कर धोखाधड़ी और खेल सट्टेबाजी के लिए ड्रीम 11 से 2000cr चाहती है जीएसटी विभाग

आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ ड्रीम 11 से जुड़े मुकदमे के बारे जिसमे कर धोखाधड़ी और खेल सट्टेबाजी के लिए ड्रीम 11 से 2000cr चाहती है जीएसटी विभाग अगर आप स्पोर्ट्स फैन हो तो आप ड्रीम 11 के बारे में अच्छे से जानते होंगे लेकिन इसके पीछे की काली सच्चाई आपको पता नही होगी।

इस कहानी की शुरुआत करते हैं यूनियन ऑफ इंडिया के दिये गए याचिका से जिसकी सुनवाई होती है 30 अप्रैल 2019 को जिसे बॉम्बे कोर्ट सही ठहराता है इस याचिका में पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867 के तहत ड्रीम 11 पर जानबूझकर गैरकानूनी ऑपरेशन्स चलाना, गैंबलिंग, बेटिंग का आरोप है और दूसरी ओर इसपर CGST के कानून 31A का उलंघन करते हुए गुड और सर्विस टैक्स की कथित चोरी का भी आरोप है।
याचिका में कहा गया है कि ड्रीम 11 सन् 2012 से अपने प्लेटफॉर्म पर जुए और खेल सट्टेबाजी के समान गतिविधियां चला रहा है और इस पर लगने वाले सामान्य कर की तुलना में बहुत कम दर चुकाया जा रहा है। याचिका के अनुसार, GST विभाग का कहना है कि ड्रीम 11 ने उच्च न्यायालयों में न्यायिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया है क्योंकि याचिकाकर्ता खुद ड्रीम 11 के साथ मिलीभगत कर सकते थे और उनके साथ जुड़े हुए थे।

Petition
इनका यह भी कहना था कि यह फैंटसी गेम कुछ भी नही बस लोगों को लालच देकर उनको लूटने का जरिया है ।ड्रीम 11 पर तो यह भी आरोप था कि वह सिर्फ 80% का ही इनवॉइस देते हैं बाकी की 20% का वह कोई GST नही भरते हैं। ड्रीम 11 वालों का कहना था कि वह 20% एस्करो एकाउंट में जमा कराते हैं लेकिन याचिकाकर्ता के तहत इसका भी कोई GST नहीं भरा जाता है।
साफ तौर पर यह देखा जा सकता है कि 65B (15) फाइनेंस एक्ट 1984 के तहत ड्रीम 11 एक गैंबलिंग है ना कि कौशल का खेल।

IFSG वेबसाइट, जो ड्रीम 11 को एकमात्र ‘संस्थापक सदस्य’ के रूप में प्रदर्शित करती है, खुद को भारत में पेश की जाने वाली स्पोर्ट्स गेमिंग सेवाओं और प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ और सच्चाई के उद्देश्य से स्थापित एक सेक्शन 8 कंपनी के रूप में वर्णित करती है। यह ज्ञात है कि इंडियन फेडरेशन ऑफ स्पोर्ट्स गेमिंग (IFSG), एक उद्योग निकाय, जो लगभग 26 गेमिंग कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे की मुंबई स्थित ड्रीम 11, फेंटेन, My11Circle जैसे अन्य लोग स्पष्टता के लिए वित्त मंत्रालय और GST समिति तक पहुंच गए है। हालांकि, बॉडी वैधता के सवालों से घिरा हुआ है जैसा कि स्टारपिक के सीईओ, त्रिगाम मुखर्जी की टिप्पणी से स्पष्ट था जब स्टारपिक ने अपना नाम अप्रैल 2019 में IFSG से निकाल लिया था और कहा कि IFSG “कुछ नया करने के लिए अनुकूल नहीं” है, और यह तब हुआ जब ड्रीम 11 के एक प्रतियोगी, Starpick, IFSG से अपना नाम वापस ले लिया था।
भारतीय संघ और अन्य उच्चतम न्यायालय में दायर की गई याचिकाएं दर्शाती है कि कर धोखाधड़ी और खेल सट्टेबाजी के लिए ड्रीम 11 पर 2000 करोड़ से अधिक की राशि संभवित देनदारी है।

ड्रीम 11 सह संस्थापक भवित सेठ द्वारा अभ्यावेदन दिया गया की क्योंकि 2017 के बाद की राजस्व जानकारी कंपनी के साथ उपलब्ध नहीं है और केवल तीसरे पक्ष के विक्रेताओं से ही प्राप्त की जा सकती है। हालांकि, GST विभाग द्वारा बार-बार अनुरोध के बावजूद, उक्त विक्रेता के विवरणों को GST विभाग को अवगत नहीं कराया गया था।

13-12-2019 को कोर्ट ने बॉम्बे कोर्ट में सुनाई गई याचिका पर मुहर लगा दी थी।

वैसे आपको यह भी बात जाननी बहुत ज़रूरी है कि 17 अप्रैल 2017 में पंजाब और हरियाण हाई कोर्ट के तहत ड्रीम 11 सिर्फ कौशल का खेल है ना कि किसी तरह की गैंबलिंग/बेटिंग की । और तो और सितंबर 2017 पंजाब और हरियाण हाई कोर्ट के जजमेंट के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नकार दिया ।

Union of India vs Gurdeep singh sanchar

लेकिन यहाँ पर गौर करने वाली बात यह भी है कि दोनों उच्च न्यायालय ने जीएसटी को दरकिनार करते हुए यहां पर निष्कर्ष पर पहुंचे कि फंतासी गेम सिर्फ कौशल का खेल है।

इस तरह का महत्वपूर्ण मुद्दा पूरे देश की जनता को पता चलना चाहिए।

भारतीय संघ द्वारा याचिका के साथ संलग्न पत्रों में, क्योंकि पत्रों द्वारा इसका प्रमाण दिया गया था। इसके बजाय, श्री सेठ ने भारतीय फेडरेशन ऑफ स्पोर्ट्स गेमिंग (IFSG) द्वारा GST परिषद को प्रतिनिधित्व करने का  कार्य लिया है।

हाल ही में, बॉम्बे के बाहर की एक वकील पूजा राजेंद्र पांडे ने बॉम्बे हाई कोर्ट में ड्रीम 11 के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऊपर लिखित “थर्ड पार्टी वेंडर” अस्तित्व में ही नहीं है और इसके बजाय ड्रीम 11 इन इनवॉइस को अपने नाम से भेजती है।

Court

 

भावित सेठ ने GST विभाग को दिए अपने पत्रों में झूठ बोला था, जो ड्रीम 11 के मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बॉम्बे में उच्च न्यायालय में पुनर्निर्देशित किए जाने का आधार थे। ये चालान को एकदूसरे से जुड़े हुए हैं, क्योंकि कर चोरी के खिलाफ ड्रीम 11 का पूरा तर्क इसके दावे पर आधारित है कि ‘कौशल का खेल’ होने के नाते, ड्रीम 11 उपयोगकर्ताओं द्वारा राजस्व के रूप में रखी गई दांव राशियों पर विचार नहीं करता है। इस पर से ऐसा लग रहा है कि दावा गलत है।

ड्रीम 11 के मामलों को 31 जनवरी को फिर से सुप्रीम कोर्ट में उल्लेख करने के लिए तारीख तय किया गया है क्योंकि गुरदीप सिंह सच्चर ने पहले के आदेश में संशोधन के लिए याचिका दायर की है और जो उसे खेल सट्टेबाजी पहलू पर बहस करने की अनुमति देता है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस नई तारीख पर कौन सा नजरिया पेश करती है।

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