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बिहार में इस उद्योग की मदद से बेरोज़गारी से मुक्ति, पढ़िए पूरी खबर

बेरोज़गारी से मुक्ति

जैसे कि बिहार में मक्के की पैदावार अच्छी है और इस दौर में लोगों को बेरोज़गारी के काफी बुरे परिणाम झेलने पड़ रहे हैं। इस वजह से मक्के पर आधारित उद्योग लगाकर बेरोज़गारी से मुक्ति पाने की बात कही जा रही है।

मक्के की अच्छी पैदावार होने से यह 12 से 15 रुपये प्रति किलो मिल जाता है। यहां से इसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश सहित दूसरे प्रदेशों में भेजा जाता है। इस मक्के को प्रोसेस कर कोर्न फ्लेक्स जैसे विभिन्न उत्पादों को बनाकर दूसरे प्रदेश के व्यवसायीयों की खासी आमदनी हो रही है, जबकि राज्य में उपलब्धि उस स्तर पर नहीं है जितनी की होनी चाहिए। इस कारण बिहार में भी मक्के के उद्योगों से बेरोज़गारी से मुक्ति पाई जा सकती है।

जानिए इन खास बातों को

अपको बता दें कि एक दशक से मक्के को प्रोसेस कर बिहार में मछली दाना, मुर्गी दाना, और पशु आहार बनाने का काम जारी है। करीब 25 यूनिट इस काम में लगी हैं। इस क्षेत्र से जुड़े एक ठाकुर के अनुसार अगर कॉर्न फ्लेक्स का बड़ा प्लांट लगाना हो तो एक से डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आएगी। बड़ी कंपनियों से तैयार कॉर्न फ्लेक्स खरीदकर सिर्फ पैकिंग करनी हो तो सिर्फ ऑटोमैटिक पैकिंग मशीन खरीद कर भी कार्य शुरू हो सकता है। ऐसी पैकिंग मशीनें तीन से चार लाख रुपये की लागत होती है। इतनी पूंजी न होने पर छोटी पैकिंग मशीन पांच से 10 हजार रुपये में खरीद कर भी कार्य शुरू किया जा सकता है।

बड़ी कंपनियां थोक में कॉर्न फ्लेक्स करीब 60 रुपये प्रति किलो बेचती हैं। इसकी पैकिंग कर प्रति किलो दो से तीन सौ रुपये तक में बेचा जा सकता है।

कॉर्न फ्लेक्स को दूध में मिलाकर खाने का प्रचलन बढ़ने से इसकी मांग में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसके अलावा मक्के से मछली दाना, मुर्गी दाना, पशु आहार भी तैयार किए जाते हैं। ऐसे उद्योग में तकरीबन 20 लाख रुपए से छह करोड़ रूपए की लागत आती है।

इन मशीनों की ज़रूरत होती है

मक्के के आधार पर लगने वाली उद्योग में रोटरी स्टेम कूकर, टंपिंग टैंक, स्टीम बॉयलर, रोटरी ओवन, फ्लैक्स मशीन, स्ट्रायरर, बाइब्रेटिंग स्क्रीन, कॉर्न फ्लैक्स बैंकिंग एवं पैकिंग मशीन। राजकोट, दिल्ली, एनसीआर, कोलकाता और भोपाल में ये मशीनें मिलती हैं।

यहां से सहायता लें

बेरोज़गारी से राहत पानी हो तो खुद का मक्के का उद्योग खड़ा किया जा सकता है। मुद्रा योजना के तहत आप बैंक से ऋण ले सकते हैं। या फिर और ग्रामोद्योग आयोग से भी सहायता प्राप्त किया जा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय एवं राज्य सरकार से 15 से 44 फीसद तक अनुदान प्राप्त कर सकते हैं।

इस उद्योग के क्रियान्वयन से पहले प्रशिक्षण लेना भी बेहतर बताया जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की नोडल एजेंसी कृषि क्लीनिक्स एवं कृषि व्यवसाय प्रशिक्षण केंद्र, सृष्टि फाउंडेशन, रेशमी कांप्लेक्स, किदवईपुरी, पटना, निफ्टेम यूनिवर्सिटी, हरियाणा, सीएफटीआरआइ, मैसूर, कर्नाटक से आदि संस्थाओं से संपर्क कर सकते हैं।

 

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