Mon. Feb 17th, 2020

पांच जिलों में हजारों लोगों से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा , जानें क्या है मामला

पांच जिलों में हजारों लोगों से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा , जानें क्या है मामला
करोड़ों का फर्जीवाड़ा : बिहार के पांच जिलों में को-ओपरेटिव सोसायटी के नाम पर लाखों लोग से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। महज तीन वर्षों में पैसा दोगुना करने और अधिक ब्याज देने का लालच देकर आम लोगों से यह ठगी की गई है। बताया जा रहा है कि आम लोगों के बीच महुआ बैंक के नाम से प्रचलित चार अलग-अलग को-ओपरेटिव सोसायटी पर लोगों को चूना लगाने का आरोप लगा है।

करोड़ों का फर्जीवाड़ा : ऐसे दिया गया धोखा

मुजफ्फरपुर के अघोड़िय बाजार इलाके में सड़क किनारे छोटी सी दुकान चला रहे रवि को नहीं पता था कि उसकी रोजाना की गाढ़ी कमाई एक दिन लुट जाएगी। महुआ बैंक के नाम पर मुन्ना चौधरी नामक एक परिचित एजेंट ने रवि को रोजाना 20 से 30 रुपया जमा करवाया। कुछ दिन में ही रवि को बैंक से अधिक ब्याज एजेंट ने लौटा भी दिया।अधिक पैसा मिलने की लालच में रवि जब हर महीने एक हजार रुपया जमा करने लगा तो फिर उसे एजेंट ने समय पूरा होने पर पैसा नहीं लौटाया। फर्जीवाड़े का शिकार हुए रवि के पास कम्पनी का सिर्फ एक बॉण्ड पेपर है और हरेक माह जमा की जाने वाली रसीद, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी उसे पैसे नहीं मिल रहे हैंं।रवि की तरह राजीव सिंह ने भी पहले महुआ प्रोजेक्ट में और फिर जलाशय बचत सहकारी समिति में अपनी गाढ़ी कमाई लगाई, लेकिन जमा पैसा लेने की बारी आई तो मुजफ्फरपुर शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों से महुआ और जलाशय नाम से चलने वाली संस्थाओं के कार्यालय बंद पाए गए।

कार्यालय को बंद कर सभी फरार :

दरअसल, साल 2013 में पटना के निबंधन रजिस्ट्रार कार्यालय से को-ओपरेटिव सोसायटी के अलग अलग चार नामों से मुजफ्फरपुर, भोजपुर, पटना, वैशाली और सीतामढ़ी जिले में फर्जीवाड़े का काम शुरू किया गया। एजेंट और अपने कर्मचारियों को बहाल कर आम लोगों से कम समय में अधिक पैसे देने का लालच देकर डेली, वीकली और मासिक तौर पर रुपये का निवेश कराया जाने लगा। इतना ही नहीं तीन वर्षों से फिक्स डिपोजिट को दोगुना करने का लालच भी निवेशकों को दिया गया। शुरुआती कुछ दिनों के बाद जब निवेश करोड़ों में हो गया तो फिर धीरे-धीरे सभी जगहों से कार्यालय को बंद कर सभी फरार हो गए।

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