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जमुई सरकारी राशन घोटाला के ज़रिये आम लोगों का खाना हज़म कर रहे थे सरकारी बाबू

जमुई सरकारी राशन घोटाला

जमुई सरकारी राशन घोटाला : बिहार के जमुई ज़िले में गंभीर सरकारी घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. उद्यान विभाग के सहायक निदेशक वेद प्रकाश के खिलाफ मलयपुर थाना में मामला दर्ज़ हुआ है. उन पर वित्तीय अनियमितता के साथ सरकारी कार्यक्रमों के संचालन में लापरवाही का आरोप लगा है. कंप्लेंट मिलने के बाद डीएम ने कारण नोटिस भी ज़ारी किया था लेकिन सहायक निदेशक द्वारा जवाब नहीं मिलने पर उन पर एफआईआर दर्ज़ करवाई गई है.

डीएम धर्मेंद्र कुमार के आदेश पर यह एफआईआर दर्ज़ करवाई गई है. इसके तहत जिला पदाधिकारी ने केस दर्ज़ करवाया है. डीएम को ज़िले के कुछ लोगों और अन्य सूत्रों से यह जानकारी मिली थी कि जिला उद्यान में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के चलते घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है. इससे जनता के राशन को ही सरकारी बाबू लोग मिलकर हज़म कर रहे थे.

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जमुई सरकारी राशन घोटाला : जानिये पूरा मामला विस्तार से

दरअसल सरकारी राशि के आवंटन के बाद भी काफी समय से योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है. जिसके बाद डीएम ने एक जांच दल बनाकर पूरे मामले की जांच का आदेश दिया था. डीएम के निर्देशानुसार जिला परिवहन पदाधिकारी और जिला कल्याण पदाधिकारी ने 38 पन्नो की जाँच रिपोर्ट को सौंपा था. इस रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की जिक्र किया गया है.

जाँच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना में लगभग 90 लाख राशि आवंटित हुई थी जबकि मात्र लगभग 48 लाख का ही वितरण किया गया है.इसका मतलब है कि लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 56% था. योजना की जाँच विवरण में योजना का महत्वपूर्ण बताते हुए बड़ी राशि का इतना समय बीत जाने के बाद भी खर्च न होने के पीछे वित्तीय अनियमितता एवं गलत मंशा को कारण बताया गया है.

वहीं वित्तीय वर्ष 2018-19 में आम की खेती के लिए केले की खेती अमरूद की खेती पपीते की खेती के अनुदान का द्वितीय किस्त का भुगतान जांच की तिथी तक नहीं किया गया है. इसके साथ ग्रीन हाउस योजना अंतर्गत में भी जिला उद्यान कार्यालय में अनियमितता बरती गई है.

जाँच प्रतिवेदन के सौंपे जाने के बाद डीएम धर्मेंद्र कुमार ने 72 घंटे का समय देकर उद्यान कार्यालय के सहायक निदेशक से जवाब तलब किया था लेकिन जवाब न मिलने पर मलयपुर थाने में एफआईआर दर्ज़ करवाई गई है.

अब आगे पुलिस की जाँच के बाद ही इस विभाग पर बड़े पैमाने पर सरकारी राशन के नाम पर वित्तीय घोटाले की बात सामने आ पायेगी.

 

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