Wed. Jan 20th, 2021

दीपावली का त्यौहार , जानिए क्यों मनाया जाता है यह ख़ास त्यौहार

दीपावली का त्यौहार

दीपावली का त्यौहार हिन्दू धर्म के लिए बहुत ही ख़ास होता है और यह हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार होता है। इस दिन दीपों की जगमगाहट से पूरा शहर चमक उठता है। दीपों का पर्व होने के कारण इसे दीपावली का नाम दिया गया है। यह त्यौहार कार्तिक महीने की अमावस्या के ख़ास दिन मनाया जाता है। इस दिन अंधेरी रात में पूरा शहर मिट्टी की जलती दिवालियों से सजता है और पूरी रात रौशनी बनाये रखता है। दीपावली का मतलब होता है, दीपों की अवली यानी पंक्ति।

क्यों मनाया जाता है दीपावली का त्यौहार

दीपावली हिन्दू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। राम जी के वनवास से लौटने पर अयोध्यावासियों ने दीयों को जला के खुशियां मनाई थी। रामायण के अनुसार, भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और उसके राज्य लंका को जीतकर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपने पुरे चौदह वर्ष के वनवास के बाद अपने राज्य, अयोध्या, वापस लौटे थे। उस दिन अयोध्यावासियों का दिल अपने सबसे परम प्रिय राजा के आगमन से बेहद खुश था। लम्बे इंतज़ार के बाद श्री रामचंद्र अपनी गालियों में वापस अयोध्यावासियों के बीच आ रहे थे।

अयोध्यावासियों ने राम जी, पत्नी सीता और भाई लक्षमण के स्वागत में पुरे जगह घी के द्वीप जलाएं। उस दिन कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की रात थी, जो कि दीयों कि रौशनी से चमक उठी थी। अयोध्यावासियों ने पूरी काली रात को दिए जला के रौशन कर दिया था। तब से आज तक भारतीय लोग इसे दीपावली के रूप में मनाते हैं और श्री राम जी के अयोध्या वापस लौटने कि ख़ुशी ज़ाहिर करते हैं।

 

अन्य कथाओं के अनुसार

दूसरी कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध करके प्रजा को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई तो द्वारका की प्रजा ने दीपक जलाकर उनको धन्यवाद दिया। एक और परंपरा के अनुसार सतयुग में जब समुद्र मंथन हुआ तो धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी के प्रकट होने पर दीप जलाकर आनंद व्यक्त किया गया। धार्मिक पुस्तक ‘स्कंद पुराण’ के अनुसार दीपक का जन्म यज्ञ से हुआ है। यज्ञ देवताओं और मनुष्य के मध्य संवाद साधने का माध्यम है। यज्ञ की अग्नि से जन्मे दीपक पूजा का महत्वपूर्ण भाग है।

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दिवाली से पहले घरों में होती है तैयारी

दीपावली दीपों का त्यौहार है। पूरा शहर इस दिन दीयों से सजता है। भारतियों का विश्वास है कि सत्य कि सदा जीत होती है और झूठ का नाश होता है। दिवाली के कुछ दिन पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हर कोई अपने घर और दूकान की साफ़-सफाई में जुट जाता है। हफ़्तों पहले ही बाजारें सजने लगती हैं। बाजारों में लाइटिंग लैंप के साथ ही साथ कई सजावट के सामान मिलते हैं। दिवाली के दिन घर कि लड़कियां और औरतें मिल के सात रंग कि रंगोली बनाते हैं। दिवाली प्रकाश और खुशियां बांटने का, अन्धकार मिटाने का त्यौहार है।

यह पाँच दिनों का त्यौहार है धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अमावश्या, कार्तिक सुधा पधमी, यम द्वितीया या भाई दूज जो धनतेरस (अश्वनी माह के पहले दिन का त्यौहार है) से शुरु होता है और भाई दूज (कार्तिक माह के अन्तिम दिन का त्यौहार है) पर खत्म होता है। दिवाली के त्यौहार की तारीख हिन्दू चन्द्र सौर कलैण्डर के अनुसार र्निधारित होती है। इस दिन दियो से पूरी रात जगमगाती है और पूजा आरती होती है।

दीपावली की तिथि और शुभ मुहूर्त जानिए

दीपावली / लक्ष्‍मी पूजन की तिथि: 27 अक्‍टूबर 2019

अमावस्‍या तिथि प्रारंभ: 27 अक्‍टूबर 2019 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से

अमावस्‍या तिथि समाप्‍त: 28 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक

लक्ष्‍मी पूजा मुहुर्त: 27 अक्‍टूबर 2019 को रात 12 बजकर 23 मिनट तक

कुल अवधि: 01 घंटे 30 मिनट

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