Sat. Sep 26th, 2020

विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश सरकार ने शिक्षा सेवा अधिकारियों को दिया बड़ा तोहफ़

शिक्षा सेवा अधिकारियों

विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश सरकार ने शिक्षा सेवा अधिकारियों के लिए बड़ा फ़ैसला लिया है। जिसके तहत अब शिक्षा सेवा अधिकारियों के लिए बीएड की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही बिहार शिक्षा सेवा नियमावली में भी संशोधन किया गया है।

शिक्षा सेवा अधिकारियों को मिला बिहार सरकार के तरफ से ये तोहफ़ा

सरकार के निर्णय के अनुसार अब शिक्षा सेवा के लिए अब बीएड डिग्री की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। जिसके लिए बिहार शिक्षा सेवा नियमावली में संशोधन भी कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के अपर सचिव गिरिवर दयाल सिंह द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिसके लिए लंबे समय से मांग की जा रही थी।

2014 में बीएड करना ज़रूरी था

ज्ञात हो कि शिक्षा सेवा के लिए बिहार शिक्षा सेवा नियमावली 2014 में बीएड डिग्री की अनिवार्यता घोषित की थी। अधिकारीयों के लिए दो साल के प्रोविजन काल में बीएड कोर्स भी करना ज़रूरी था। वहीं अब 2020 में बिहार शिक्षा सेवा नियमावली में संशोधन के साथ इसकी अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। जिससे कि अब शिक्षकों कि बीएड के झमेले में उलझना नहीं पड़ेगा। सरकार या निर्णय शिक्षकों के लिए तोहफ़े के सामान माना जा रहा है।

जानिए एक और खास बात

अपको बता दें कि इसके अलावा 31 दिसंबर तक शिक्षा विभाग ने जिला अपीलीय प्राधिकार के 58 पीठासीन पदाधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाया गया है। शिक्षा विभाग द्वारा इसके लिए संकल्प जारी हुआ है। शिक्षा विभाग के उप सचिव अरशद फिरोज का कहना है कि सभी 38 जिला अपीलीय प्राधिकार में 76 पद सृजित किए गए हैं। अभी नई नियुक्ति में वक्त लगेगा, इसलिए यह फैसला लिया गया है। जिला अपीलीय प्राधिकार में दो पीठासीन पदाधिकारी होते हैं, जिनमें एक रिटायर्ड न्यायिक अधकारी और दूसरे बिहार प्रशासनिक या बिहार शिक्षा सेवा के रिटरयर्ड अधिकारी होते हैं। उनका कार्यकाल पांच साल होता है। उनकी अधिकतम उम्र सीमा 70 वर्ष है।

 

अन्य खबरें पढ़ें सिर्फ बिहार एक्सप्रेस पर.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *