Fri. Aug 14th, 2020

पटना ऐम्स में मरीज़ों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू, अच्छे परिणाम की कामना

कोरोना वायरस से बचने खातिर पटना के ऑल इंडिया इंस्‍टीच्‍यूट ऑफ मेडिकल साइंस में तैयार की गई वैक्सीन का ट्रायल मरीजों पर शुरू कर दिया गया है। जिसके लिए ऐम्स के पांच कर्मी तथा 20 कोरोना संक्रमित मरीज़ योद्धा के रूप में आगे आए हैं। अपको बता दें इस ट्रायल के परिणाम 194 दिनों की अवधि में सामने आयेंगे।

वैक्सीन का ट्रायल बहुत सावधानी बरतते हुए लिया जाता है। अब जैसे कि मानव प्रशिक्षण के लिए चुने गए लोगों की स्‍वास्‍थ्‍य जांच व अन्‍य औपचारिकताएं सोमवार से ही शुरू कर दी गईं थीं।

कोरोना वैक्सीन ट्रायल

पांच सदस्यों की टीम द्वारा अध्ययन किया जाएगा

मानव प्रशिक्षण का अध्ययन एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सी.एम. सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम करेगी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के दिशा-निर्देश के अनुसार यह अध्ययन 194 दिनों में मुकम्मल होगा। इस टीम में हिंदुस्तान बायोटेक के सदस्यों के साथ एम्स के डॉ. रवि कीर्ति, डॉ. संजय पांडेय और डॉ. शमशाद शामिल हैं।

इस तरह किया जाएगा प्रशिक्षण

पहले डोज के बाद दो घंटे तक विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम अच्छे तरीके से मॉनिटरिंग करेगी। फिर सभी को घर भेज दिया जाएगा। दूसरे और चौथे दिन रिसर्च टीम उनके घर जाकर परीक्षण करेगी। अगर सब सही रहा तो 14 दिनों बाद दूसरा डोज दिया जाएगा। इसमें भी सब सामान्य रहा तो 28 दिन बाद पुन: दवा के प्रभाव-दुष्प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इसके बाद 104वें और 194वें दिन रिसर्च टीम पुन: दवा के प्रभाव का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। यानी 14, 28, 104 और 194 दिनों के अंतराल पर मिली रिपोर्ट आइसीएमआर को भेजी जाएगी। इसी आधार पर वैक्सीन को हरी झंडी दिखाने का फैसला लिया जाएगा।

अपको इस वैक्सीन की खास बात बता दें कि यह निष्क्रिय है, इसलिए दुष्प्रभाव की आशंका नहीं के बराबर है। वैज्ञानियों ने इसे जब जानवरों पर प्रयोग किया था तब उन्हें कोई घातक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। फिर भी प्रोटोकॉल के तहत किसी भी मुश्किल स्थिति के लिए हर प्रावधान मौजूद हैं।

तीन चरणों में पूरा होगा प्रशिक्षण

अपको बता दें कि मानव प्रशिक्षण की प्रक्रिया तीन चरणों में मुकम्मल होगी। पहले चरण में 18 से 55 वर्ष तक के देश भर के 375 लोग शामिल होंगे। एम्स, पटना में करीब 50 लोगों को वैक्सीन का हल्का डोज देकर उन पर अच्छे से नज़र रखी जाएगी। अगर परिणाम पॉज़िटिव आता है तो दूसरे चरण में 12 से 65 वर्ष के 750 लोगों को शामिल किया जाएगा। इनमें एम्स, पटना में करीब 100 लोगों को रैंडमली डबल डोज दिया जाएगा। तीसरे चरण में यह देखा जाएगा कि वैक्सीन से शरीर में किस स्तर का एंटीबॉडी विकसित हुआ है। अगर यह सही रहा तो उस व्यक्ति को वायरस के संपर्क में लाया जाएगा और देखा जाएगा कि उसका शरीर वायरस से संक्रमित होता है या नहीं, यदि नेगेटिव रिपोर्ट आती है तो वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया जा सकेगा।

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