Thu. Apr 2nd, 2020

दुल्हन लाती है बारात- अलग है यहाँ की परंपरा, बिना दहेज होती है शादी

दुल्हन लाती है बारात

दुल्हन लाती है बारात- अलग है यहाँ की परंपरा, बिना दहेज होती है यह शादी

दुल्हन लाती है बारात: जहाँ दहेज से लेकर और कई खर्चे होते हैं शादी में वहीं दहेज प्रथा और अनावश्यक शादी खर्च की दिशा में कढुआ शादी एक अलग ही पहल के रूप में देखी जा रही है और साथ ही यहाँ दुल्हन लाती है बारात। कढुआ शादी की  परंपरा को धीरे-धीरे समाज के सभी वर्गों के लोग अपनाने लगे हैं। मुख्य रूप से देख जाये तो इस प्रकार की शादी अभी व्यवसाई वर्ग के लोग के बीच प्रचलन में है।

इस शादी में दुल्हन ही अपने रिश्तेदारों के साथ बरात ले के दूल्हे के घर सजधज के जाती है और वहां शादी की सारी रस्में बिना किसी तामझाम के एक ही रात में संपन्न हो जाते हैं। यानी इस शादी में दुल्हन लती है बारात

दहेज प्रथा नहीं है इस शादी की परंपरा

कढुआ शादी में दहेज प्रथा पर करारा प्रहार है, दुल्हन से कोई दहेज की मांग नहीं होती है। व्यवसायिक वर्ग में माहुरी, मारवाड़ी, बनिया, तेली इत्यादि समाज के लोग इसी शादी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसको लेकर माहुरी पंचायत भवन के अध्यक्ष ओंकार सेठ, चुनाव प्रभारी रितेश सेठ इत्यादि बताते हैं कि इस प्रकार के शादी के चलन में आने से दहेज प्रथा में काफी कमी आई है। शादी का खर्च भी कम होता है और समय की भी बचत होती है।

पैसो की भी होती है बचत…

इस तरह की शादी में दुल्हन लाती है बारात दूल्हे के घर में जहां मैरिज हॉल में सभी जुटते हैं और फिर एक ही रात में शादी के सारे विधि विधान संपन्न हो जाते हैं ताकि समय काम लगे, फिर दुल्हन को लेकर दूल्हा अपने घर चला जाता है। इसकी वजह से तिलक, फलदान और बेवजह की रस्मों का खर्चा बचता है।

दुल्हन के यहां गाजे-बाजे के साथ बारात ले जाने का खर्च बचता है। रिशेप्शन का खर्च बच जाता है। सारे समारोह एक ही रात में एक ही साथ संपन्न हो जाते हैं। खर्च कम होने से वर-वधू दोनों पक्ष के पैसे बच जाते हैं और बिल्कुल साधारण तरीके से शादी संपन्न हो जाती है।

ओमकार सेठ कहते हैं कि शेखपुरा जिले में साल भर में ऐसी सौ से अधिक शादियां इसी तरह होती है। इस शादी में वर पक्ष के यहां जब वधू पक्ष के लोग आते हैं तो वह अपने रिश्तेदारों के साथ बारात की तरह ही आते हैं। उनका स्वागत किया जाता है। साथ ही साथ शादी के खर्च को आधा-आधा दोनों पक्ष के लोग आपस में बांट लेते हैं।

इस प्रकार की शादी में पैसे की बचत के साथ साथ समय की भी काफी बचत होती है। आम तौर पर शादी विवाह के समारोह एक सप्ताह तक चलते हैं परंतु इसमें एक ही रात में सारे कार्यक्रम संपन्न हो जाते हैं।

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