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बिहार पुलिस एसोसिएशन ने दिया दिल्ली पुलिस का साथ इस वजह से

बिहार पुलिस एसोसिएशन दिल्ली

बिहार पुलिस एसोसिएशन ने दिया दिल्ली पुलिस का साथ : दिल्ली की तीस हजारी अदालत में हिंसा के मामले में वकीलों और पुलिस के बीच का मामला बढ़ता ही जा रहा है। मंगलवार को दिल्ली पुलिसकर्मियों ने सडको पर उतर कर अपने सम्मान और हक़ के लिए एक मजबूत पक्ष रखने का काम किया। मंगलवार की सुबह पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन दिया गया और वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। इधर बिहार प्रदेश में इस मुद्दे का असर अनोखे रूप में देखने को मिला है। बिहार पुलिस एसोसिएशन ने दिल्ली पुलिस को नैतिक समर्थन दिया है और एक निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बिहार पुलिस एसोसिएशन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें कहा गया है कि कानून को दोनों पुलिस और वकील के लिए जाना जाता है और कानून हाथ में नहीं लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है। शनिवार के दिन तीस हजारी कोर्ट में पार्किंग को लेकर पुलिस और वकील एक दूसरे से भिड़ गए। दोनों के बीच मामला इतना अधिक हो गया कि पुलिस की तरफ से फायरिंग की गई। इसी की प्रतिक्रिया वकीलों पुलिस वाहनों और बर्बरता को आग लगा दी थी।

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बिहार पुलिस एसोसिएशन ने दिया दिल्ली पुलिस का साथ : समर्थन और विरोध स्वर

बिहार पुलिस एसोसिएशन

अन्य राज्यों में भी इसको लेकर समर्थन और विरोध स्वर देखने को मिले हैं। हरियाणा पुलिस कर्मचारी एसोसिएशन ने दिल्ली में तीस हजारी कोर्ट में वकीलों की गुंडागर्दी और बाद में कार्रवाई की निंदा की है। एसोसिएशन ने मंगलवार दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए प्रदर्शन का खुला समर्थन किया है। हरियाणा पुलिस यूनियन है दिल्ली पुलिस द्वारा आत्म सम्मान के लिए किये गए इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है।

यूपी आईपीएस एसोसिएशन ने भी दिल्ली पुलिस को अपना समर्थन दिया है। आईपीएस एसोसिएशन कि हम पुलिस के साथ घटना की निंदाकी है। हम ड्यूटी करते हुए दुर्व्यवहार और हिंसा को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। हम न्याय की मांग के लिए दिल्ली पुलिस के साथ है।

बिहार पुलिस एसोसिएशन ने सबसे अलग रुख रखते हुए अपने पेशे की बजाय दिल्ली पुलिस का समर्थन किया है। यह वाकई रोचक और साहसिक है। बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने दोषी वकीलों पर कार्यवाही की बात कही है और वहीँ अधिकतर बार एसोसिएशन वकीलों के समर्थन में है। बिहार पुलिस एसोसिएशन ने पीड़ित के पक्ष में सहानभूति दिखते हुए एक निष्पक्ष समर्थन दिया है जो कि सराहनीय कदम है।

क्योंकि कानून की नज़र में प्रथम दृश्या पहली गलती वकीलों की ही सामने आ रही और पूरी जांच होने तक दोनों पक्षों को शांति व्यवस्था बनाये रखते हुए कामकाज जनहित में चालू कर देना चाहिए।

 

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