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बिहार में पंचायत चुनाव ​की तैयारी शुरू…

बिहार में पंचायत चुनाव

पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव सफलता पूर्वक संपन्न होने और नयी ​सरकार के गठन के बार प्रदेश एक बार फिर से चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। प्रदेश में मार्च से मई के बीच बिहार में पंचायत चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है। जून में वर्तमान त्रिस्तरीय पंचायतीराज प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस बाबत ​विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। हालांकि विधानसभा चुनाव में ईवीएम से हुए चुनाव में गड़​​बड़ियों को लेकर विपक्षी पार्टियों द्वारा जताई गई आशंकाओं को देखते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी जोड़ पकड़ने लगा है। पहले भी पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से ही कराये जाते हैं लेकिन बदले हुए माहौल में विभाग इवीएम से भी चुनाव कराए जाने की संभावना टटोलने में लगा हुआ है और विभाग के स्तर पर इस दिशा में भी तैयारी हो रही है।

बिहार में पंचायत चुनाव की क्या है तैयारी

पंचायत चुनाव में जिन पदों के लिए चुनाव कराया जाता है उसमें 8386 मुखिया, 8386 सरपंच, एक लाख 14 हजार वार्ड सदस्य, एक लाख 14 हजार पंच, राज्य की 534 पंचायत समितियों के लिए 11497 पंचायत समिति के सदस्य और 38 जिलों में 1161 जिला पर्षद सदस्यों का चुनाव कराया जाना है। राज्य में एक लाख 14 हजार वार्ड हैं। ऐसे में हर वार्ड में एक बूथ के साथ ही वैसे वार्डों में जहां पर 700 से अधिक मतदाता होंगे वहां पर सहायक बूथों का गठन किया जायेगा।
छह पदों के लिए होंगे चुनाव
बिहार में त्रि-स्तरीय ग्रामीण स्थानीय निकायों में छह पदों के लिए चुनाव होते हैं। इसमें वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, पंच और सरपंच आदि प्रमुख हैं। मतदाताओं को वोटिंग के दौरान मतपत्रों के छह सेट मिलते हैं। अब अगर ईवीएम का उपयोग किया जाएगा तो वोटर्स को छह पदों को लेकर मतदान के लिए ईवीएम पर छह बटन दबाने होंगे। प्रदेश में कुल 8,387 ग्राम पंचायतें (त्रिस्तरीय स्थानीय निकायों का निचला स्तर), 534 पंचायत समितियाँ और 38 जिला परिषद हैं। राज्य में पंचायती राज संस्थाओं में कुल 2.58 लाख पद हैं और ग्राम पंचायतों में कम से कम 1.15 लाख वार्ड सदस्य हैं।

ईवीएम या बैलेट नहीं हुआ है निर्णय
पंचायत चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से होगा या पहले की तरह बैलेट पेपर इस बात को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, बावजूद इसके हाल ही में एसईसी ने भी पंचायती राज विभाग को ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराने का प्रस्ताव भेजा है। विभाग का कहना है कि ईवीएम से चुनाव में अधिक पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा मतगणना विसंगतियों और इसमें धांधली की भी जांच हो सकेगी।
पहली बार होगा ईवीएम का प्रयोग
यदि ईवीएम के माध्यम से पंचायत चुनाव आयोजित होता है तो त्रिस्तरीय ग्रामीण स्थानीय निकायों में 2.58 लाख पदों को भरने के लिए यही पहला इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रयोग होगा। प्रदेश में ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराने की अनुमानित लागत 392 करोड़ रुपये होगी, जो 2016 के पंचायत चुनावों में किए गए खर्च की तुलना में 142 करोड़ रुपये अधिक होगी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 2016 के पंचायत चुनावों में राज्य सरकार ने 250 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
कई राज्यों में सफल रहे हैं प्रयोग
जानकारों की राय है कि केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में ईवीएम का इस्तेमाल पंचायत चुनाव कराने के लिए किया गया है। पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने पुष्टि करते हुए बताया कि- हमें एसईसी से प्रस्ताव मिला है और इस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा। हालाकि यदि ईवीएम के माध्यम से पंचायत चुनाव आयोजित होता है तो त्रिस्तरीय ग्रामीण स्थानीय निकायों में 2.58 लाख पदों को भरने के लिए यही पहला इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रयोग होगा। प्रदेश में ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराने की अनुमानित लागत 392 करोड़ रुपये होगी, जो 2016 के पंचायत चुनाव में किए गए खर्च की तुलना में 142 करोड़ रुपये अधिक होगी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 2016 के पंचायत चुनावों में राज्य सरकार ने 250 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
विपक्षी दलों का होगा बैलेट पेपर पर जोर
वैसे तो बिहार में पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होता है। हालांकि मुखिया और जिला परिषद सदस्य जैसे पदों के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन मिलता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि विपक्षी दल बैलेट पेपर से एक बार फिर से चुनाव कराने की मांग कर सकते है। अब तक पंचायत चुनाव बैलट पेपर के माध्यम से ही आयोजित किए गए हैं।

क्या कहते हैं प्रतिनिधि
जहानाबाद के धरनई पंचायत के मुखिया अजय सिंह यादव का कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह ही यदि पंचायत चुनाव भी ईवीएम से हो तो इससे काफी सहूलियत हो जायेगी। बैलेट से चुनाव कराने में कई ग्रामीण महिलायें व पुरूष मतदान के क्रम में गलत मुहर लगा देते हैं जिससे कि वोट खराब हो जाता है ईवीएम में इसकी संभावना कम से कम होती है। साथ ही धांधली की संभावना कम होती है। इसके इतर यदि सहूलियत की बात करें तो प्रशासन को काफी सहूलियत होता है और आम मतदाता को ईवीएम पर भरोसा है। साथ ही काउंटिंग में भी सुविधा होती है। ईवीएम की गड़बड़ी की संभावना नहीं है जो आरोप लगाते हैं वो बेबुनियाद है। उल्लेखनीय है कि धरनई के मुखिया अजय सिंह यादव को अपने पंचायत के विकास के लिए कई राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने मन की बात कार्यक्रम में कोरोना काल में मुखिया से बातचीत कर उनके काम की सराहना कर चुके हैं। इन्हें दीनदयाल पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार, नानाजी देशमुख पुरस्कार, बाल हितैषी पंचायत पुरस्कार 2019,मनरेगा पुरस्कार 2018 से सम्मानित किया जा चुका है। इतना ही नहीं धरनई को देश का पहला सौर्य उर्जा प्रकाशित पंचायत होने का सम्मान भी हासिल हुआ था वो भी उस दौर जब बिहार के गांवो में दूर—दूर तक बिजली का नामोनिशान नहीं था।

वहीं नालंदा के पंचायत कराय परशुराय पंचायत की महिला मुखिया किरण कुमारी, जो कि खुद पढ़ी लिखी हैं और इतिहास विषय में मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं.. अलग राय रखती हैं। किरण ने कहा कि बैलेट पेपर से ही चुनाव कराना सही रहता है। अब तक बैलेट पेपर से चुनाव होता आया है। आगे भी ऐसा ही होना चाहिए। वे कहती हैं ​बैलेट पेपर में सबकुछ नजर के सामने होता है। गड़बड़ की संभावना कम होती है, जबकी ईवीएम मशीन में कुछ से कुछ जोड़ कर गड़बड़ हो जाती है। ये बात सही है कि काउंटिंग में देरी होती है लेकिन दुरूस्त होती है। अपना अनुभव साझा करते हुए किरण कहती हैं कि जब मैं चुनाव लड़ रही थी तो कई दौर की कांउटिंग हुई और रात 10 बजे मुझे सर्टिफिकेट मिला। यह पूछे जाने पर कि बिहार के पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिये जाने से क्या बदला है। किरण कुमारी ने कहा कि बहुत कुछ बदल गया है। पंचायत में आरक्षण से महिलाओं में काफी जागरूकता आई है। चाहे बच्चों को स्कूल में दाखिले का सवाल हो,पोषण का सवाल हो या कोई भी प्रश्न ले लें महिला प्रतिनिधि काफी बेहतर तरीके सो काम करती हैं। वे शिक्षित भी हो रही हैं और जागरूक भी। हमारे पंचायत में जब भी ग्राम सभा की बैठक होती है आधी से ज्यादा महिलायें ही शामिल होती हैं। यहां तक की महिला प्रतिनिधि होने से गांव की नयी नवेली दुल्हन भी अपनी बात खुल के रख सकती है।

जल्द शुरू होगा मतदाता पुनरीक्षण का काम

राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग ने चुनाव संबंधित तमाम प्रबंध सुनिश्चित करने की कवायद शुरू ​कर दिया है। इसी महीने से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम भी शुरू हो जाएगा। यहां तक आयोग कार्यालय को भी पंचायत चुनाव के मद्देनजर तकनीकी रूप से सुसजिज्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी डीएम और एसएसपी-एसपी से जुड़ेंगे।
दाखिल होगा प्रत्याशियों का ऑनलाइन विवरण
राज्य चुनाव आयोग विभाग की वेबसाइट पर उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल करने समेत उम्मीदवारों की आय, संपत्ति और व्यक्तिगत प्रोफाइल का विवरण अपलोड करने पर विचार कर रहा है। अब तक संसदीय चुनाव और विधानसभा चुनाव में ही ऐसा होता आया है। विभाग का कहना है कि इससे लोगों को जनप्रतिनिधियों और उम्मीदवारों के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। आयोग अप्रैल से पीआरआई के चुनाव कराने की योजना बना रहा है और 2021 में चरणबद्ध तरीके से मई तक विस्तार कर सकता है। उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया मार्च के बाद से शुरू होगी।
इस बार पंचायत आम निर्वाचन के लिए राज्य में एक लाख 19 हजार 24 बूथ गठित किये गये हैं। चुनाव के पहले आयोग द्वारा बूथों के पुनर्गठन का प्रस्ताव जिलों से मांगा जायेगा। पिछले पंचायत चुनाव चुनाव 2016 में जनवरी में ही बूथों का प्रारूप प्रकाशित किया गया था।

 

 

 

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