Sat. Dec 7th, 2019

बिहार की जेलों में एड्स का प्रकोप गहराया

जेलों में एड्स

जेलों में एड्स का प्रकोप : बिहार की जेलों में एड्स (ऐकवायर्ड इम्यूनोडिफीसिअन्सी सिंड्रोम) बीमारी से पीड़ित कैदियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। जहां 4010 कैदियों के रक्त परीक्षण में 89 (एचआईवी) संक्रमण पाया गया है। जेल के महानिरीक्षक मिथिलेश मिश्रा ने कहा है कि बिहार की विभिन्न जेलों में कैद चार हज़ार से अधिक कैदियों के रक्त परीक्षण किए गए, जिनमें से 89 एड्स से पीड़ित पाए गए।

उन्होंने बताया है कि इन पीड़ित कैदियों का विभिन्न केंद्रों में इलाज किया जा रहा है। जांच के दौरान, 122 कैदियों में यक्ष्मा (टीबी) का संक्रमण भी पाया गया है।

जेलों में एड्स का प्रकोप : ब्लड टेस्ट से पता चला समस्या का

Dreadful truth revealed from the jails of Bihar, many prisoners are suffering from this disease

मिश्रा ने कहा कि कई लोग जेल आने से पहले ही एचआईवी संक्रमित थे, जबकि कुछ कैदियों ने जेल में आने के बाद यह संक्रमण फैलाया। उन्होंने कहा कि संभवतः अप्राकृतिक यौन संबंध एड्स से पीड़ित कैदियों के लिए भी कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार की जेलों में कैदियों के बीच एचआईवी-एड्स संक्रमण को और अधिक फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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बिहार की जेलों में एड्स को ठीक करने के लिए, जेल और सरकारी नशामुक्ति केंद्रों ने हाल ही में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है। इस अनुबंध के तहत, राज्य की जेलों में कैदियों के बीच टीबी संक्रमण की रोकथाम के लिए भी सभी पक्ष काम करेंगे। बिहार राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के परियोजना निदेशक डॉ अभय प्रसाद ने कहा कि एड्स के 80 प्रतिशत मामले असुरक्षित और अनावश्यक यौन क्रियाओं के कारण होते हैं।

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एड्स को निश्चित तौर पर हराया नहीं जा सकता लेकिन इसका सामना ज़रूर किया जा सकता है। हर किसी को जीने का अधिकार है ऐसे में बेहतर दवाई सेवन से लैस ट्रीटमेंट लेकर एड्स से पीड़ित मरीज के अंतिम दिनों को बढ़ाया ज़रूर जा सकता है।

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