Sat. Oct 31st, 2020

खूब लगे मुर्दाबाद के नारे बिहार कांग्रेस की कलह फिर सतह पर

बिहार कांग्रेस

-Pratiksha Tripathi

महागठबंधन में घटक दलों की सीटों की घोषणा आज शाम ही कर दी जाएगी लेकिन अभी भी सब सही नहीं दिखाई दे रहा है। अभी भी दरारे नजर आ रही है सीटों को लेकर घटक दलों की दरारें आज तब सामने आई जब बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ता औरंगाबाद की लोकसभा सीट हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा हम को बेचने का आरोप लगाते हुए पार्टी के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह, गोहिल प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर मदन मोहन झा तथा डॉक्टर अखिलेश सिंह के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

आज सुबह से ही सदाकत आश्रम में असंतुष्ट कार्यकर्ता जुटने लगे थे औरंगाबाद सीट को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को देने के खिलाफ धरना पर बैठ गए और उसके बाद उन्होंने नारेबाजी भी शुरू कर दी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉक्टर मदन मोहन झा, कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल तथा डॉ अखिलेश सिंह के खिलाफ। कार्यकर्ता पैसे लेकर औरंगाबाद सीट हम से बेचने का आरोप लगा रहे थे।कार्यकर्ता औरंगाबाद सीट पर कांग्रेस के निखिल कुमार को टिकट देने की मांग कर रहे थे।

बिहार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने यह क्या किया!

कार्यकर्ताओं के अनुसार शक्ति सिंह गुजरात से आकर यहां गंदी राजनीति कर रहे हैं।कार्यकर्ता सिर्फ मुर्दाबाद के नारे ही नहीं लगा रहे थे अपने नेताओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। अगर औरंगाबाद से निखिल कुमार को सीट नहीं दी गई तो उन्होंने पूरे बिहार में पार्टी का विरोध करने की भी बात कही है।

बता दें आपको कि दिल्ली-पटना-रांची में कई दौर के महामंत्री के बाद महागठबंधन में सीट बंटवारे का झंझट सुलझा लेने का दावा किया जा रहा था लेकिन बिहार कांग्रेस मुख्यालय में हुई आज की घटना नेताओं की पोल खोल दी है। कुछ सीटों के सहयोगी दलों के खाते में जाने के कारण घटक दलों में आंतरिक असंतोष भी है जिन पर सहमति बन चुकी है आज केवल उन्हीं सीटों के संबंध में जानकारी देंगे महागठबंधन के दलों के नेता जिन सीटों में अभी सहमति नहीं हुई है यानी कि जो असहमति वाली सीटें हैं उनकी जानकारी दूसरे फेज में दी जाएंगी।

बिहार कांग्रेस वास्तव में महागठबंधन में बस सीटों के लिए दूसरे के वोट बैंक ट्रांसफर होने का इंतज़ार कर रही थी और यह अलायन्स हो जाने के बाद उसके कार्यकर्ताओं से उसे विरोध झेलना पड़ रहा क्यूंकि कैडर से लेकर लीडरशिप तक में कुछ भी ऐसा नहीं है जिसमे कांग्रेस की बड़ी भूमिका हो

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