Sat. Oct 31st, 2020

बेहतरीन अभिनेता होने के साथ और किन वजह से लोकप्रियता हासिल की भागलपुर के अशोक कुमार ने

अशोक कुमार

भागलपुर के अशोक कुमार भारतीय सिनेमा जगत के महान कलाकार होने के साथ-साथ एक सिद्धस्त चित्रकार व होमियोपैथ के चिकित्सक भी थे। इस बात की जानकारी उनकी चचेरी भतीजी व तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग की पूर्व प्रोफेसर डॉ. रत्ना मुखर्जी से प्राप्त हुई।

इनके अनुसार अशोक कुमार ने दादा-दादी का एक ऐसा बेहतरीन तैल-चित्र बनाया था जिसे देख ऐसा लगता था कि मानों चित्र से निकल दोनों लोग अब बोल उठेंगे। इस चित्र को उन्होंने मुंबई के चेंबर स्थित मकान के बैठकखाने में सामने वाली दीवार पर लगाया रखा था। वहीं, होमियोपैथ के चिकित्सक के रूप में अशोक ने काफी ख्याति प्राप्त की थी। चरित्र अभिनेता डेविड का इलाज भी इन्होंने काफी लंबे समय तक किया था। मुंबई के अलावा नासिक, पुणे, शोलापुर आदि शहरों से भी इनके पास लोग इलाज कराने के लिए मरीज़ पहुंचा करते थे। खास बात यह है कि मरीजों से वह कभी फ़ीस नहीं चार्ज करते थे।

नेकी करने में भी माहिर थे

डॉ. रत्ना मुखर्जी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार दादा साहब फालके पुरस्कार से सम्मानित हुए फिल्म अभिनेता दादा मुनि अपनी नेकी के लिए भी लोकप्रिय थे। इन्होंने अपने दोनों ड्राइवर्स के अवकाश ग्रहण करने के बाद हसमत अली को आजीवन पेंशन दी और खुर्शीद को मुंबई में चार कमरों का फ्लैट भी नज़र किया। अशोक कुमार के पिता अरुण कुमार मुखर्जी बॉलीवुड इंडस्ट्री में गायक थे। दिल का दौरा पड़ने से अशोक का निधन हुआ था जिसके बाद इनके चाचा जी ने इनके परिवार को संभाला।

सादा जीवन जीनें में था विश्वास

रत्ना मुखर्जी का कहना है कि, दादा मुनि को अपने बिस्तर पर चादर और तकिया नहीं पसंद थी। यह उनकी सादगी का परिचय करवाती है। भागलपुर के मसाकचक में रहने वाले अशोक कुमार के चचेरे साले सोमनाथ बनर्जी का कहना है कि वह शोभा बनर्जी से पहली बार यहीं मिले थे। इसके बाद वे दोनों शादी के बंधन में बंध गए।

1977 में जब सोमनाथ बनर्जी जेठी मां सुरोमा देवी (अशोक कुमार की सास) के साथ दादा मुनि के घर पर गए थे तब वहां उन्होंने देखा था कि अशोक अपने भोजन के बाद उबले हुए कद्दू के कुछ टुकड़े ज़रूर लेते थे। बचपन में वह अक्सर भागलपुर के दौरे करते थे। यहां वो आदमपुर मोहल्ला स्थित मामा शानू बनर्जी के घर रुका करते थे। उन्हें यहां रेशमी कुर्ते में ज़्यादातर देखा जाता था।

 

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