Mon. Dec 9th, 2019

महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन पतन पर सीएम नीतीश कुमार ने रखी अपनी बात

शिवसेना-भाजपा गठबंधन पतन

शिवसेना-भाजपा गठबंधन पतन पर सीएम नीतीश कुमार : महाराष्ट्र में भाजपा और उसके एनडीए सहयोगी शिवसेना के गठबंधन के पतन के साथ बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार सुर्खियों में आ गए है। सोमवार को संवाददाताओं द्वारा उनसे जब पूछा गया कि बिहार में राजग के लिए यह घटनाक्रम क्या मायने रखता है, तो उन्होंने कहा कि यह शिवसेना और भाजपा के बीच का मामला था और इससे उन्हें (जदयू) को कोई फर्क नहीं पड़ा। जेडीयू -बीजेपी गठबंधन वर्तमान में बिहार विधानसभा में सत्ता में है और 2020 में संयुक्त रूप से राज्य चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।

इससे पहले 30 अक्टूबर को जदयू जिसने जून में मोदी सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था, ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में पार्टी के लिए “आनुपातिक प्रतिनिधित्व” के लिए जोर दिया था। नीतीश कुमार ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के जनादेश को भाजपा के खिलाफ बताया था लेकिन नीतीश  कुमार ने इसे बावजूद भाजपा को मंत्री पद के बंटवारे के अलावा उपमुख्यमंत्री का पद दिया।243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में जेडीयू के पास 70 सीटें हैं, जबकि भाजपा के पास  54 सीटें हैं।

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शिवसेना-भाजपा गठबंधन पतन पाठ का सारांश !

कल  यानी रविवार को राज्यपाल से मिलने के बाद महायुति गठबंधन को विफल करने के लिए शिवसेना को दोषी ठहराते हुए, भाजपा ने घोषणा की कि वह  राज्य में अगली सरकार नहीं बनाएगी। शिवसेना, दूसरे सबसे बड़े हिस्से के रूप में तब सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था – सोमवार शाम तक अपनी क्षमता साबित करते हुए राकांपा और कांग्रेस दोनों ही अब सरकार बनाने के ऊपर बातचीत के दौर में है और अपने विधायकों के साथ भगवा पार्टी के साथ संभावित गठबंधन पर चर्चा कर रहे हैं।

दोनों पार्टी प्रमुख दिल्ली में एक कोर कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जबकि शिवसेना सांसद संजय राउत गठबंधन की शर्तों की पेशकश करने के लिए दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने के लिए तैयार है। बीजेपी ने अगले सरकार बनाने में असमर्थता जताते हुए कहा कि देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में एक कोर ग्रुप की बैठक आयोजित करने की तैयारी है।

दो वैचारिक रूप से समान पार्टियों भाजपा और शिवसेना के बीच प्रमुख झगड़ा 50-50 के फार्मूले के लिए है और प्रत्येक दल सीएम पद को लेकर दावा कर रहा है। बीजेपी ने दोनों शर्तो को मना कर दिया और शिवसेना को 13 कैबिनेट पोर्टफोलियो देने और अपने लिए 26 पोर्टफोलियो रखने की इच्छा जताई।

ताज़ा अपडेट के अनुसार कांग्रेस ने स्पष्ट तौर पर शिवसेना को समर्थन देने की पेशकश नहीं की है। ऐसे में इन तीनो दलों  के बीच सरकार बनने को लेकर संभावना प्रबल है लेकिन यह सरकार बनेगी कैसे इसको लेकर कोई खाका तैयार नहीं हो पाया है। वैसे भविष्य में यह सरकार कितना टिक पाएगी यह भी एक भविष्य की गर्भ में रहने वाला एक प्रश्न है।

 

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