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बिहार की भूमिका:चंद्रयान 2 में बिहार के इन होनहारों की भूमिका

बिहार की भूमिका:चंद्रयान 2 में बिहार के इन होनहारों की भूमिका
बिहार की महत्वपूर्ण भूमिका:चन्द्रायन 2 की सफलता पर देश को जितना गर्व है कही उस से जादा बिहार के भागलपुर और लखीसराय जिले को  गर्व है।होगा क्यों नही,यहाँ के दो लालो ने भी जो योगदान दिया है। दरअसल भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (बीसीई) के पूर्ववर्ती छात्र अमरदीप कुमार और लखीसराय के बड़हिया के इन्द टोला निवासी ललन सिंह के पुत्र सोनू कुमार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बिहार की भूमिका:सीनियर साइंटिस्ट  हैं अमरदीप:-

बीसीई के पूर्ववर्ती छात्र अमरदीप कुमार ने बीसीई से बीई (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) 2007 में किया। इसके बाद वह पहली बार में ही इसरो की परीक्षा में पास कर चुने गए। इसी दौरान उन्होंने एनटीपीसी, भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर, डीआरडीओ की लिखित परीक्षा, यूपीएससी के इंजीनियरिंग की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की। लेकिन उन्होंने इसरो को ही चुना। आज वहां वह सीनियर साइंटिस्ट के तौर पर इसरो में कार्यरत हैं और अपनी योग्यता की मिसाल भी पेस कर दी चंद्रयान दो को सफल बना के।

चंन्द्रमा के अध्ययन में काफी सहयोग मिलेगा:-

उन्होंने बताया कि वह चंद्रायन टू को ले जाने वाले रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3 के लिए काम किया था। उसी तरह चंन्द्रायन-टू के लिए भी काम किया। फिलहाल इसरो ने आगे की पढ़ाई के लिए अमरदीप को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंग्लोर भेजा है। उन्होंने क्या काम किया गोपनीय बात कहकर बताने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के बाद चंन्द्रमा के अध्ययन में काफी सहयोग मिलेगा। वहां की जानकारी अच्छे तरीके से भारत हासिल कर सकेगा।

बिहार की भूमिका:सरकारी कॉलेज में की पढ़ाई:-

अमरदीप ने कहा कि उनके पिता देवघर के पास मधुपुर में छोटे व्यवसायी थे। उन्होंने प्राथमिक से इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल या कॉलेज में की। कहां पढ़ा यह महत्वपूर्ण नहीं बल्कि क्या और कैसे पढ़ाई की यह महत्वपूर्ण है। बीसीई का उनके जीवन में काफी अहम रोल रहा। जो लोग सरकारी स्कूल या कॉलेजो का मजाक बनाते है उनके लिए भी एक सिख है।

लखीसराय के सोनू का भी मिशन में योगदान:-

चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े लखीसराय के बड़हिया के इन्द टोला निवासी ललन सिंह के पुत्र सोनू कुमार ने लखीसराय जिले का मान बढ़ाया है। सोनू इस समय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) में वैज्ञानिक है और देश के इस मिशन मून में वैज्ञानिकों की टीम में योगदान दिया है। सोनू एक बहुत ही गरीब परिवार से था काफी आर्थिक तंगी को झेला, छात्र जीवन फूस से बनी झोपड़ी में रहकर गुजारा। प्राथमिक शिक्षा बड़हिया से तथा 12वीं बालिका विद्यापीठ लखीसराय से करने के बाद आईआईटी मेंस और डब्लूबी मेंस को निकालकर जाधवपुर यूनिवर्सिटी बंगाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। आज इसरो में बतौर वैज्ञानिक सेवा दे रहे हैं। उनके बचपन के मित्र सौरव ने बताया की सोनू बचपन से ही विश्व प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिकविद् अल्बर्ट आइंस्टीन को प्रेरणास्रोत मानते थे और आज अपनी मेहनत व लगन से सपने को सच कर दिखाया है।
सोनू के पिता ललन सिंह किसान हैं और उन्हें अपने बेटे की सफलता पर नाज है। विदित हो कि इसरो द्वारा 978 करोड़ रुपए की लागत से बने 3877 किलोग्राम के चंद्रयान-2 को भारत ने अब तक के सबसे ताकतवर 640 टन वजनी स्पेसक्राफ्ट रॉकेट जीएसएलवी लॉन्च किया है।

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