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जनता दरबार रद्द- जाने क्यों रद्द किया तेज प्रताप ने जनता दरबार

 

लालू प्रसाद के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने जनता दरबार लगाने का फैसला किया था। सूत्रों की मानें तो खबर आ रही है जहां पर ही बताया जा रहा है कि तेज प्रताप ने जनता दरबार लगाना रद्द कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आई खबर में यह लिखा है कि तेज प्रताप ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि जनता दरबार क्यों नहीं लग रहा है पर किन्हीं कारणों से वो नहीं लग पाएगा। जनता दरबार रद्द हो जाना कई सवाल जरूर खड़े कर रहा है।

जनता दरबार रद्द- तेज प्रताप सुनते जनता की समस्या

तेज प्रताप की जनता दरबार में तेज प्रताप खुद जनता की समस्या सुनने वाले थे। साथ ही उसका समाधान भी निकाले वाले थे। आज 27 मई को आरजेडी के दफ्तर में जनता दरबार का आयोजन होना था जिसमें तेज प्रताप लोगों की समस्या सुनने वाले थे। यही नहीं वह कार्यकर्ताओं की समस्या पर भी ध्यान केंद्रित करने वाले थे साथ ही उसका भी समाधान निकालने वाले थे।

जनता दरबार रद्द- हार की होनी थी समीक्षा

सूत्रों की माने तो ये कहा गया था कि तेजप्रताप लोकसभा चुनाव में हुए हार की समीक्षा भी करेंगे। कार्यकर्ताओं से जानेंगे कि चुनाव में कहां चूक हुई, जिससे आरजेडी की लोकसभा चुनावों में इतनी बड़ी हार हुई है। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद हुआ था।

जनता दरबार रद्द- लड़ाई है एक मात्र वजह

ये हर कोई जानता है कि यादव परिवार में चल रही लड़ाई ही उनके हर की एक मात्र वजह है। भाई भाई की आपसी लड़ाई जब सरेआम हो जाए तो जनता पीछे हो जाती है। जनता कैसे ऐसे लोगों को सत्ता में बैठा सकती है जो अपने पारिवारिक कलेश को ही नहीं रोक पा रहे। तेज प्रताप अगर हार की समीक्षा न भी करें न तो लोग उन्हें खुद उनके हार की वजह बता देंगे।

महागठबंधन को भरना पड़ा खामियाजा

तेजप्रताप यादव ने तेजस्‍वी यादव से शिवहर और जहानाबाद सीट पर अपने उम्मीदवार अंगेश कुमार और चंद्रप्रकाश को टिकट देने की मांग की थी, लेकिन छोटे भाई नहीं माने. दोनों भाइयों के बीच मनमुटाव का असर है कि बिहार में आरजेडी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। तेजप्रताप और तेजस्वी के बीच चल रहे घमासान का खामियाजा पूरे बिहार में महागठबंधन को उठाना पड़ा है।राजद की अगुआई वाले महागठबंधन को लोकसभा चुनावों में 40 में से 39 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है. इस हार के बाद कांग्रेस और रालोसपा जैसे दलों ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।

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