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आखिर क्यों हारे कन्हैया:क्या JNU में बोई हुई बीज का जनता ने दिया जवाब

आखिर क्यों हारे कन्हैया
आखिर क्यों हारे कन्हैया:इस बार के लोकसभा चुनाव में बिहार के सबसे चर्चित संसदीय सीटों में बेगूसराय भी एक थी।जहा टक्कर कन्हैया और गिरिराज में थी।एक तरफ कन्हैया राष्ट्रवाद पे चोट करने के लिए मशहूर हुवे थे तो दूसरी तरफ हिन्दू फायर ब्रांड नेता कहे जाने वाले गिरिराज सिंह थे जो बहुत मनाने के बाद बेगूसराय से लड़ने के लिए तैयार हुवे और जीत भी गए।

आखिर क्यों हारे कन्हैया:पूरा दम लगाने के बाद भी हारे कन्हैया:-

 जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और बीजेपी के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह के चुनावी मैदान में आने से बेगूसराय सीट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रही। कन्हैया कुमार को सीपीआई और उससे जुड़े संगठनों ने इस तरह से प्रोजेक्ट किया कि वह उनके चेहरे के बूते एक बार फिर पुनर्जीवित हो सकती है। इसके लिए तमाम तरह के उपाय किए गए। बेगूसराय में बॉलीवुड सितारों से प्रचार करवाया गया।तो शेहला और जिग्नेश भी प्रचार करने में पीछे नही रहे। नुक्कड़ नाटकों का दौर भी चला। ऐसा लगने लगा कि कन्हैया के आने से वामपंथ की धारा को बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए संजीवनी मिल गई। लेकिन, चुनाव नतीजों के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वह वामपंथियों के लिए एक बड़ा सेटबैक है।

फिल्मी सितारे भी नही आए काम:-

वामपंथ के गढ़ में कन्हैया को मिले मतों का विश्लेषण किया जाए तो सीताराम येचुरी, जावेद अख्तर, प्रकाश राज, स्वरा भास्कर, शबाना आजमी जैसे दिग्गजों का आना भी बेकार साबित हुआ।कुछ तो अपने बेतुका बयान के वजह से कन्हैया का वोट काट गए। बीजेपी के गिरिराज सिंह ने कन्हैया कुमार को 4 लाख 22 हजार 274 मतों के भारी अंतर से मात दी और उन्हें कुल 57 प्रतिशत मत मिले।जिसके बाद कन्हैया कुमार का कोई आता पता नही लग रहा,लेकिन फिर भी चुनाव हारने के बाद कन्हैया कुमार मोदी को ट्विटर पे घेरते दिख जाते है।अभी शायद वो हार से कोई सबक नही सीखे।

मीडिया के नजरो में भी थे कन्हैया:-

मीडिया के शोर के बावजूद चुनावी मैदान में कन्हैया कुमार की हालत इतनी पतली रही कि उनको अपने घर और अपने बूथ पर भी जीतने लायक वोट नहीं मिले। खुद कन्हैया कुमार को अपने घर बीहट के मोहल्ले पर बने बूथों पर भी एनडीए के प्रत्याशी गिरिराज सिंह से काफी कम वोट मिले। बीहट के वार्ड क्रमांक 15 के बूथ पर कन्हैया कुमार को 703 तो गिरिराज सिंह को 807 वोट मिले।मतलब लोगो ने कन्हैया को इतना बता दिया की हिन्दुस्तान में रह कर अपने देश के खिलाफ भाषा बोलेंगे तो आप को अपने मत का इस्तेमाल कर के जनता करारा जवाब देगी।खैर कन्हैया कुमार ने जो बीज JNU में बोया था उसका फल जनता ने दे दिया।

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